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मेजर जनरल जी डी बख्शी भारत की शक्ति का लोहा मानते हैं

चीन,पाकिस्तान, कश्मीर और आतंकवाद को लेकर बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले मेजर जनरल जी डी बख्शी इन दिनों फिर से सुर्खियों में हैं।

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जोधपुर

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MI Zahir

Jun 23, 2018

Major General G D Bakhshi

Major General G D Bakhshi in patrika keynote jodhpur

जोधपुर. देश विदेश के मीडिया में चर्चित रहे मेजर जनरल जी डी बख्शी अपने वक्तव्यों के लिए फिर से सुर्खियों में हैं।

सेवानिवृत्त मेजर जनरल जीडी बख्शी ने यहां राजस्थान पत्रिका की ओर से 29 जुलाई 2017 को जोधपुर के अमरगढ़ रिसोर्ट में आयोजित वार्षिक आइडिया फेस्ट कीनोट में भी बेबाकी से बयान दिए थे। उन्होंने कीनोट कार्यक्रम में बॉर्डर लाइन (इण्डो-पाक के बीच रिश्ते) विषयक सत्र में कहा था कि भारत की सैन्यशक्ति किसी रूप से कम नहीं है। भारत ने 1962 व 1971 के युद्ध देखे और उसके बाद खुद को इतना मजबूत कर लिया कि हमारे पास पाकिस्तान ही नहीं, चीन को जवाब देने की ताकत है। जब हमने 1962 व 1971 में पाकिस्तान को धूल चटा दी। उस समय हमारी पीढ़ी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए, नई पीढ़ी पाकिस्तान चार टुकड़े कर दे, तो ही शांति मिलेगी।

शांतिदूत बन कर दुर्योधन के दरबार में गए थे

उन्होंने कहा था कि कहा कि महाभारत के युद्ध पहले भगवान श्रीकृष्ण युद्ध को रोकने व शांति की अपील के लिए शांतिदूत बन कर दुर्योधन के दरबार में गए थे। दुर्योधन पांडवों को एक सुई की नोक जितनी जमीन भी देने को तैयार नहीं हुआ। इसी प्रकार से भारत में आतंक फैला रहे पाकिस्तान और चीन-भारत के बीच संभावित युद्ध रोकने के लिए हमारे प्रधानमंत्री हरसंभव प्रयास कर चुके हैं। कोई भी प्रयास सफल नहीं हुआ। अब महाभारत करने का समय आ गया है।

कश्मीर में भारत का परचम फहराता रहेगा

बख्शी ने तब कीनोट में था कि कश्मीर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए बड़ा सिरदर्द है। पाकिस्तान कश्मीर मेंं जेहाद नहीं, बल्कि फसाद फैला रहा है। 30 साल से कश्मीर में साम्प्रदायिकता का जहर घोला जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान को चुनौती देते हुए देते हुए कहा कि 10 हजार साल बाद भी कश्मीर में भारत का परचम फहराता रहेगा।

ढाल से कुछ नहीं होगा, तलवार चलानी पड़ेगी
उन्होंने जोधपुर में कहा था कि हम 30 साल से रक्षात्मक युद्ध लड़ रहे हैं। युद्ध के लिए ढाल व तलवार दोनों चाहिए। केवल ढाल से कुछ नहीं होना, तलवार भी चलानी पड़ेगी। बख्शी ने सरकार की भूमिका पर सवाल किया कि हमें हर निर्णायक लड़ाई पानीपत में ही क्यों चाहिए। हम पाकिस्तान में घुसकर जवाब क्यों नहीं दे रहे। बर्दाश्त की सीमा पार हो चुकी है। बदतमीज मुल्क को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। गीता में भी यही लिखा है कि अर्जुन लड़ो, डरो मत-लड़ो। अंहिसा छोड़ो, लडऩे की तैयारी करो। अब महाभारत तो किसी भी स्थिति में रुक नहीं सकती। महाभारत होकर रहेगी और हम विरोधियों को धूल चटाकर जवाब देंगे।

भारत के धैर्य को कमजोरी नहीं समझें
बख्शी ने भारत-चीन सीमा विवाद पर कहा था कि चीन 1962 के युद्ध में भारतीय सेना के प्रदर्शन को लेकर भ्रम नहीं पाले, क्योंकि दो युद्धों के बाद भारत ने अपनी सैन्य ताकत कई गुना बढ़ा ली है। भारत अब फिलिपींस जैसा देश नहीं है। वह आणविक शक्ति बन चुका है। चीन ने 1962 जैसी भूल की तो भारत मुंहतोड़ जवाब देगा। पाकिस्तान को भारत के धैर्य को कमजोरी नहीं समझना चाहिए। भारत सेना के पास पाकिस्तान का मिनटों में सफाया करने का साजोसामान है।

हमें कारगिल का युद्ध देखना पड़ा

बख्शी ने जोधपुर में कहा था कि 1990 में सोवियत संघ का पतन नहीं होता, तो भारत की आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं होती। इसका सीधा असर सैन्य ताकत बढ़ाने पर पड़ा। उसके बाद 10 साल तक हम जो हथियार खरीदना चाह रहे थे, वे नहीं खरीद पाए और हमें कारगिल का युद्ध देखना पड़ा। यूपीए सरकार ने अपने दो विफल कार्यकाल में रक्षा सौदे फूंके, रक्षा सौदे हुए ही नहीं। बोफोर्स तो खरीद मामले में तो 30 साल से तोप रिप्लेसमेंट नहीं किया गया। वायुसेना में 45 स्क्वाड्रन होने चाहिए, वे 30 तक ही रह गए। उन्होंने डोकलाम विवाद को पाकिस्तान का फेंका पासा बताते हुए कहा कि यह चीन का भ्रम है। बख्शी ने जोधपुर में कहा था कि चीन ने 1962 के बाद 38 साल में कोई युद्ध नहीं देखा। चीन की सेना जंग खा चुकी है। इसलिए अब भारत की सेना का सामना करने में सक्षम नहीं है।

चीन पिटना चाहता है, तो युद्ध छेड़ दे

बख्शी ने यहां कहा था कि जो लोग इतिहास से नहीं सीखते, वे पिटते ही रहेंगे। वैसा ही चीन के साथ होगा। भारत की सरकार को मैमने की तरह मिमियाना बंद करना चाहिए। युद्ध के देवता युद्ध की आतुरता पसंद नहीं करते। इसलिए हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन युद्ध होता है, तो हम किसी भी मुकाबले में कम नहीं हैं। चीन पिटना चाहता है, तो युद्ध छेड़ दे।