जोधपुर के इन पुलिस थानों में मामले निपटाने का अजीब है गणित, साल समाप्ति पर सामने आई जानकारी

Vikas Choudhary

Publish: Dec, 07 2017 02:43:40 (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

नए मामले दर्ज करने की बजाय टालने को प्राथमिकता

 

जोधपुर . नववर्ष के आगमन में एक महीना शेष है। एेसे में राज्य की पुलिस वर्षभर में दर्ज प्रकरणों को निपटाने में जुट गई हैं। पुलिस थानों के जांच अधिकारी का पूरा फोकस लम्बित प्रकरणों के निस्तारण में है। जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस स्टेशन रातानाडा में सबसे अधिक और महिला थाना (पूर्व) में सबसे कम प्रकरण लम्बित हैं। पुलिस मुख्यालय ने प्रत्येक थानों के लिए दस प्रतिशत पैंडेंसी करने का लक्ष्य रखा है। यही वजह है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई पुलिस स्टेशन में नए मामलों को दर्ज करने में टालमटोल शुरू हो गई है।


बिना कारण पत्रावली लम्बित न रखने का निर्देश

 

पुलिस मुख्यालय ने इस वर्ष लम्बित मामलों का निस्तारण करने के लिए दस प्रतिशत का लक्ष्य रखा है। सभी पुलिस स्टेशन को पैंडेंसी दस प्रतिशत के अंदर रखनी होगी। बगैर कोई कारण के प्रकरण पत्रावली लंबित नहीं रखने के निर्देश है।


रातानाडा, महामंदिर, मण्डोर व शास्त्रीनगर में तीन गुना पैंडेंसी

 

पुलिस कमिश्नरेट जोधपुर के थानों के अपराध व लंबित प्रकरणों के आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे अधिक रातानाडा थाने में पत्रावलियां लम्बित पड़ी है। इसके बाद पुलिस स्टेशन महामंदिर, मण्डोर व शास्त्रीनगर में निर्धारित लक्ष्य से तीन गुना तक मामले लम्बित हैं। जबकि महिला थाना पूर्व में पैंडेंसी सिर्फ ९.६४ प्रतिशत ही है, जो सबसे कम है।


दस्तावेजों का संकलन, एफएसएल जांच से बढ़ी पैंडेंसी

 

पुलिस कमिश्नरेट जोधपुर में अमूमन उदयमंदिर थाने में पैंडेंसी अधिक रहती है। हालांकि इस बार यहां कुछ कमी आई है। इस थाने में कोर्ट में पेश इस्तगासे के आधार पर दस्तावेज से जुड़े धोखाधड़ी के मामले अधिक दर्ज होते हैं। एेसे में इन मामलों की जांच में दस्तावेज संकलन व एफएसएल जांच रिपोर्ट मिलने में देरी के कारण निस्तारण में समय लगता है।


नई शिकायतें दर्ज करने की बजाय जांच में रखने को तवज्जो

 

पुलिस मुख्यालय के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्य के हर जिले की पुलिस जुटी हुई है। एेसे में यदि कोई फरियादी शिकायत लेकर थाने पहुंचता है तो अमूमन उसे टरकाया जा रहा है। गम्भीर अपराधिक वारदात को ही दर्ज की जा रही है।

 

इनका कहना है

 

कुछ अपराधिक घटनाओं के बाद धरपकड़ के लिए अधिकारियों के बाहर होने से लम्बित मामले बढ़े हैं। हर थाने की अपराध समीक्षा बैठक लेकर पैंडेंसी कम करने के निर्देश दिए गए हैं। दिसम्बर में और कमी आएगी। हर अपराधिक घटना को दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।


डॉ अमनदीप सिंह कपूर, पुलिस उपायुक्त (पूर्व) जोधपुर।

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