
MSP NEWS--2150 की एमएसपी के बावजूद प्रदेश में 1200 में बिक रहा बाजरा
जोधपुर।
खरीफ सीजन में किसानों द्वारा बोए जाने वाली फ सलों में सबसे बड़े बुवाई रकबे वाली बाजरे की फ सल के बाजार भावों ने किसानों के लिए आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। वह भी तब, जब राज्य सरकार किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के गारंटी कानून लाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने जा रही है। राजस्थान में खरीफ सीजन की फ सल के कुल रकबे में से बाजरे का 27 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा होता है। इस बार मौसम अनुकूल रहने से किसानों को बाजरे का अच्छा उत्पादन मिला है लेकिन जैसे ही बाजरा बाजार में आने लगा, इसके भाव दो हजार प्रति क्विंटल से गिरकर 1200 रुपए क्विंटल पर आ गए। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने लग गया।
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40 लाख हैक्टेयर में बुवाई
प्रदेश में खरीफ सीजन में 40 लाख हैक्टेयर में बाजरे की बुवाई हुई थी, जहां 44 लाख मीट्रिक टन बाजरा उत्पादन का अनुमान है। बाजरे का समर्थन मूल्य 2150 रुपए क्ंिवटल है, वहीं इसका बाजार भाव 1200 रुपए क्ंिवटल है। ऐसे में किसानों को प्रति क्ंिवटल 900-950 रुपए का नुकसान हो रहा है। अगर समय पर समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं होती है तो प्रदेश के किसानों को 400 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ेगा।
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नहीं भेजा बाजरा खरीद का प्रस्ताव
प्रदेश सरकार 31 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर नए कृषि कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने सहित किसानों को समर्थन मूल्य की गारंटी दिलाने के लिए नया कानून लाने की बात कह रही है, लेकिन दावे के उलट बाजरा खरीद के लिए केंद्र सरकार को अभी तक प्रस्ताव तक नहीं भेजा है।
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प्रदेश में बाजरा बुवाई व अनुमानित उत्पादन
फ सल - बुवाई - उत्पादन
बाजरा - 39.42 - 43.64
धान - 02.18 - 07.93
मक्का - 09.34 - 17.64
(बुवाई लाख हैक्टेयर व उत्पादन लाख मीट्रिक टन)
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फ सल - बाजार मूल्य - समर्थन मूल्य
बाजरा - 1200 - 2150
धान - 1400 - 1868
मक्का - 1200 - 1850
(बाजरा भाव व समर्थन मूल्य रुपए प्रति क्विं)
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प्रदेश में समर्थन मूल्य पर बाजरा की खरीद नहीं होती है। केन्द्र सरकार ने प्रस्ताव नहीं मांगा , इसलिए राज्य सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर बाजरा खरीद का प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।
कुंजीलाल मीणा, प्रमुख शासन सचिव
कृषि व सहकारिता, जयपुर
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संघ लगातार सरकार को ज्ञापन देकर समर्थन मूल्य पर बाजरा व धान खरीद शुरू करने की मांग कर रहा है लेकिन सरकार की इन फ सलों की खरीद की मंशा नजर नही आ रही है। इससे किसान करोड़ो रुपए का नुकसान उठाने को मजबूर है।
तुलछाराम सिंवर, प्रांत प्रचार प्रमुख
भारतीय किसान संघ
Published on:
31 Oct 2020 07:57 pm
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