यूथ ने बदली सनसिटी की साहित्यिक फिजां, ओपन माइक के साथ बढ़ रहा स्टेज नाइट कल्चर

यूथ में पॉपुलर हो रहा ओपन स्टेज कल्चर, युवा रचनाकार नए तरीके से पेश कर रहे हैं रचनाएं

By: Harshwardhan bhati

Published: 13 Aug 2019, 11:29 AM IST

हर्षवर्धन सिंह भाटी/जोधपुर. बीते जमाने से मुशायरे न सिर्फ लोगों के मनोरंजन का साधन रहे हैं बल्कि इसके माध्यम से साहित्य साधना को आमजन तक पहुंचाया जाता रहा है। वक्त के साथ ही अब कविता पढऩे और सुनने के तरीकों में खासा बदलाव देखने को मिलने लगा है। सादगी को ओढ़े रखने वाली साहित्यिक गोष्ठियों के कलेवर में आधुनिकता का तडक़ा लगने से अब यह युवाओं को आकर्षित करने लगी है। जैसा प्रख्यात शायर अहमद फराज कह चुके हैं कि नए लहजे में ढलना चाहती है, गजल कपड़े बदलना चाहती है...। बस कुछ ऐसे ही सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर की साहित्यिक फिजां में बदलाव देखने को मिल रहा है। चमक-धमक, लाइटों और साउंड इफेक्ट्स के साथ साहित्य को प्रस्तुत करने का ट्रेंड बढऩे लगा है। पहले से चली आ रही साहित्यिक परंपराओं से इतर अब ओपन माइक्स और इम्प्रोव नाइट्स आदि कॉन्सेप्ट्स में युवा रचनाकार नए तरीकों से अपनी रचनाओं को पेश कर रहे हैं।

गीत संगीत के साथ कॉमेडी
अपनी बातों और जज्बातों को बयां करने और युवाओं तक पहुंचाने के लिए आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों में प्रयोगधर्मी रचनाकार अपनी कविताओं और नज्मों को पढ़ रहे हैं। इसके साथ इन प्लेटफॉम्र्स से जुड़ कर रहे युवा अपनी अन्य प्रतिभाओं को भी मंचित कर रहे हैं। इसमें गीत-संगीत की प्रस्तुतियों के साथ कॉमेडी प्रमुख हैं। एक ही कार्यक्रम में कविता पाठ सहित अन्य विधाओं के होने से यह कॉन्सेप्ट युवा वर्ग में खासा पसंद किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर क्रेज
इन कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां देने के साथ युवा वर्ग इन्हें सोशल मीडिया पर सुनना और शेयर करना भी पसंद कर रहे हैं। सोशल मीडिया को प्रमोशन का माध्यम बनाने के साथ ही कलाकार की पहुंच अन्य शहरों और आयोजनों तक हो जाती है। ऐसे में सोशल मीडिया पर कार्यक्रमों को लाइव भी प्रस्तुत किया जा रहा है। इस कॉन्सेप्ट से दूर बैठे युवाओं को भी जोड़ा जा रहा है।

यह प्रदान कर रहे हैं मंच

1. कैफियत - ओपन माइक शैली से इतर कैफियत युवाओं को साहित्य से जोडऩे के लिए प्रयासरत है। इसमें स्थापित शायरों और अदीबों को सुनने का मौका दिया जा रहा है। देशभर के प्रख्यात युवा शायर अपने कलाम पढ़ रहे हैं। इसका कॉन्सेप्ट शायर और श्रोताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। कार्यशालाओं के माध्यम से भाषा के सुधार पर जोर दिया जा रहा है।

2. एमटैट - मधुशाला द आर्टिस्ट टेवर्न (एमटैट) शहर के उन कलाकारों को मंच प्रदान कर रहा है जो अपना टैलेंट लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं। एमटैट से न केवल कवि व लेखक वरन सिंगर, कॉमेडियन, एक्टर और डांसर भी जुडकऱ अपनी प्रतिभा का मंचन कर सकते हैं। यह प्रयोगधर्मी कलाकारों और नए उद्यमियों को बढ़ावा दे रहा है। ओपन माइक कार्यक्रमों में चुने गए कलाकारों को इम्प्रोव नाइट कार्यक्रम में परफॉर्म करने का अवसर दिया जा रहा है।

3. आर्ट ऑल्टर - इस आर्ट कम्युनिटी में युवाओं को मौलिक रचनाओं को प्रस्तुत करना होता है। मुसाफिर और द नोन अनोन कलर्स ऑफ यूथ विषयक थीम बेस शो में युवा कविता पाठ करते हैं। फ्यूजन म्यूजिक व ओपन माइक शो के माध्यम से खालिस देसी वाद्य यंत्र रावण हत्था वादकों और आधुनिक वाद्य यंत्र वादकों को साथ परफॉर्म करवा करवाया जाता है।

4. हुनर - इसमें कविता पाठ सहित बीट बॉक्सिंग, सिंगिंग, ड्रामा, स्टैंड अप और रैपिंग आदि करने का मौका दिया जा रहा है। हुनर अपने नाम के अनुसार हुनरमंद युवाओं को मंच प्रदान कर शहरवासियों के सामने आने का अवसर दे रहा है। इससे जुड़ कर युवा कलाकार न सिर्फ कविता या कहानी का पाठ कर सकता है बल्कि मनोरंजन की अन्य विधाओं को प्रसारित कर सकता है।

5. कायरा - कायरा का अर्थ अनूठा होता है। कायरा अनूठे कलाकारों को अपनी कला की विभिन्न शैलियों को प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान कर रहा है। कायरा कला संयोजन और उसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से युवाओं को जोड़ रहा है। ओपन माइक कार्यक्रमों में युवा अपने मन की अभिव्यक्ति सहित संगीत आदि की प्रस्तुति भी दे सकता है।

6. इजहार - युवाओं के लिए साहित्यिक कार्यक्रमों सहित अनौपचारिक बैठकों के माध्यम से साहित्य के प्रति जागरूक कर रहा है। इसकी बैठकों में साहित्यिक चर्चाओं सहित उसके प्रस्तुतिकरण पर जोर दिया जाता है। ओपन माइक में युवाओं को अवसर दिए जाने के साथ ही स्थापित साहित्यकारों के माध्यम से युवाओं को असल साहित्य से जोडऩे के अवसर दे रहा है।

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