बनाड़ के पास स्थित रेलवे फाटक ऐसे दे रही हादसों को आमंत्रण

बनाड़ के पास स्थित रेलवे फाटक ऐसे दे रही हादसों को आमंत्रण
बनाड़ के पास स्थित रेलवे फाटक ऐसे दे रही हादसों को आमंत्रण

Jitendra Singh Rathore | Updated: 14 May 2018, 01:13:50 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

गार्ड ट्रैफिक रुकवाता है, लेकिन बैरियर नहीं है

 

जोधपुर . एक रेलवे फाटक ऐसा भी है, जहां फाटक बंद करने के लिए गार्ड तैनात रहता है। इसके लिए फाटक के पास ही गार्ड रूम भी बनाया गया है, लेकिन जब ट्रेन आती है तो यह फाटक बंद नहीं होता है। क्योंकि फाटक बंद करने के लिए बैरियर ही नहीं लगे हैं। यह है जोधपुर के बनाड़ के पास स्थित रेलवे फाटक, जहां ट्रेन आने की सूचना पर एक गार्ड दोनों तरफ जा कर वाहन चालकों को बताता है कि पटरी पार न करें। जानकारी के मुताबिक बनाड़ के पास स्थित इस रेलवे फाटक पर पहले बैरियर लगे थे और ट्रेन आने से पहले ही यह बंद हो जाता था। यहां 24 घंटे गार्ड मौजूद रहता था। इसके लिए गार्ड रूम भी फाटक के पास ही बना हुआ है। पिछले साल अचानक ही रेलवे ने यहां से बैरियर हटा लिए और फाटक को मानव रहित बना दिया। फाटक शहर के नजदीक होने के कारण यहां हादसों की आशंका बनी रहती थी। इस वजह से इस फाटक की निगरानी होमगार्ड के अधीन कर दी गई, लेकिन बैरियर वापस नहीं लगाए। अब यहां हर वक्त एक होमगार्ड तैनात रहता है। जब भी ट्रेन आने की सूचना मिलती है तो होमगार्ड रोड के बीच में खड़ा होकर दोनों तरफ से आने वाले वाहन चालकों को रोकने की कोशिश करता है। उन्हें बताता है कि ट्रेन आ रही है। अब सवाल यह उठता है कि जब यहां हर वक्त गार्ड को तैनात रखना पड़ता है तो रेलवे बैरियर क्यों हटाए? गार्ड तैनात रहने के बाद भी इस फाटक पर हादसे हो चुके हैं।

 

 

गार्ड के इशारे से कैसे रुकें?

आम तौर पर जहां रेलवे फाटक बंद होते हैं। वहां भी लोग बैरियर के नीचे से पैदल जाते हुए या उसके नीेचे से बाइक निकालते हुए देखे जा सकते हैं। जब बैरियर लगे होने के बाद भी लोग नहीं रुकते हैं तो गार्ड के इशारे से कौन रुकेगा? फाटक पर मौजूद लोगों व गार्ड ने बताया कि कुछ लोग तो इशारा करते ही रुक जाते है। जबकि कई लोग नहीं रुकते हैं और जिस वक्त ट्रेन आती है तब तक पटरी पार करते रहते हैं। कई बार हादसे होते होते बचे हैं।

 

डम्पर से टकरा गई थी ट्रेन
इस फाटक पर बड़ा रेल हादसा होने के बाद भी इसकी सुध नहीं ली गई है। इसी साल 21 जनवरी को एक बजरी से भरा डम्पर ट्रेन के सामने आ गया था, जिससे हादसा हुआ था। यहां वाराणसी से जोधपुर आ रही मरुधर एक्सप्रेस डम्पर से भिड़ गई थी। डम्पर में बजरी भरी हुई थी और वह ट्रेन के इंजन में फंस गया था। उस वक्त भी लापरवाही की वजह से हादसा हुआ था। डम्पर चालक ने फाटक पर खड़े गार्ड की आवाज अनसुनी कर दी थी। सुबह करीब 6 बज कर 10 मिनट पर मरुधर एक्सप्रेस के सामने अचानक बजरी से भरा डम्पर निकल रहा था। गेट पर मौजूद गार्ड ने डम्पर चालक को ट्रेन आने की बात कहते हुए रुकने के लिए कहा था, लेकिन उसने गार्ड की बात अनसुनी करते हुए गेट को पार करने का प्रयास किया और हादसा हो गया। डम्पर गेट से करीब 600 मीटर आगे तक घसीटते हुए दो हिस्सों में बंट गया था। हादसे में ट्रेन का इंजन भी डम्पर से टकराने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। इस हादसे में ट्रेन के यात्री हताहत नहीं हुए थे लेकिन डम्पर चालक गंभीर घायल हो गया था। उस वक्त भी इस फाटक पर सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई गई थी।

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