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डीएनए टेस्ट के लिए नमूने तक नहीं लिए, आइओ ने जताई थी आशंका

#Double murder- ट्रक में आग लगाकर दो जनों को जिंदा जलाने का मामला : पुलिस ने दोनों कंकाल एक ही व्यक्ति को सौंप दिए थे

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डीएनए टेस्ट के लिए नमूने तक नहीं लिए, आइओ ने जताई थी आशंका

डीएनए टेस्ट के लिए नमूने तक नहीं लिए, आइओ ने जताई थी आशंका

जोधपुर.
डांगियावास बाइपास पर बीस साल पहले ट्रक में आग लगाकर दो व्यक्तियों को जिंदा जलाने के मामले में पुलिस की लापरवाही रही थी। कंकाल में बदले दोनों मृतकों के डीएनए जांच के लिए नमूने तक नहीं लिए गए थे। एक मृतक की शिनाख्त तक नहीं हुई थी और दूसरे मृतक की गलत शिनाख्त कर चालक बता दिया गया था। पोस्टमार्टम के बाद दोनों कंकाल एक ही परिजन को सौंप दिए गए थे। तत्कालीन जांच अधिकारी उप निरीक्षक रतनलाल राव को मौत पर अंदेशा हो गया था। उसने जांच में कई बिन्दुओं पर आशंका जताई थी, लेकिन उनका तबादला होने के बाद मर्ग की फौरी तौर पर जांच कर पत्रावली कलक्टर कार्यालय में जमा करवा दी गई थी।
डीएनए जांच करवाते तो पहले ही हो सकता था खुलासा
एक मई 2004 की रात डांगियावास बाइपास पर खड़े ट्रक में आग लग गई थी। दो व्यक्ति जिंदा जल गए थे। दिल्ली निवासी चन्द्रभान सोनी ने चालक के कंकाल की शिनाख्त अपने पुत्र बालेश कुमार के रूप में की थी। खलासी की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। पुलिस ने मर्ग दर्ज कर पोस्टमार्टम के बाद दोनों कंकाल चन्द्रभान को सौंप दिए थे। तब कंकालों की डीएनए जांच के लिए हड्डियों के नमूने तक नहीं लिए गए थे। यदि कंकाल का बालेश कुमार की संतान या अन्य से डीएनए मिलान करवाया जाता तो हत्याकाण्ड का पहले ही खुलासा हो सकता था।
आइओ को अंदेशा हो गया था कि हादसा नहीं है...
मर्ग दर्ज होने के बाद डांगियावास थाने के तत्कालीन उप निरीक्षक रतनलाल राव ने जांच की थी। विभिन्न बिन्दुओं पर उन्हें मामले पर अंदेशा हो गया था। इस बारे में उन्होंने जांच में उल्लेख भी किया था। जांच के बीच में उनका तबादला हो गया था। बीस साल बाद दिल्ली पुलिस की जांच में बालेश कुमार के जीवित होने की पुष्टि हुई थी। तब डांगियावास थाना पुलिस ने मर्ग की जांच रि-ओपन की थी। उसमें तत्कालीन आइओ को आशंका होने संबंधी फाइंडिंग सामने आई थी। पुलिस बयान लेने के लिए समदड़ी में उनके घर पहुंची थी, लेकिन दो-तीन साल पहले उनका निधन हो गया था।
इन बिन्दुओं पर था आइओ को अंदेशा
- अमूमन चलते वाहन में आग लगने पर चालक या खलासी फंसने से जिंदा जलते हें। इस ट्रक में जब आग लगी थी तब वह खड़ा था। चालक-खलासी जान बचाकर बाहर निकल सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ था।
- बालेश कुमार के परिवार की पृष्ठ भूमि काफी संदेहास्पद थी। एक साले की पहले ही हत्या कर दी गई थी। दूसरे साले का हादसे में निधन हो गया था। तीसरे साले खुशीराम की बालेश व उसके भाई ने मिलकर हत्या की थी।
- ट्रक जलने से दस दिन पहले साले खुशीराम की हत्या की गई थी। बालेश व उसका भाई आरोपी थे। भाई को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। दस दिन बाद ट्रक में आग व बालेश के जिंदा जलना संदेहास्पद थी।

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