जोधपुर की शादियों में जाना कहीं महंगा न पड़ जाए आपको, सावों के सीजन में फैल रही ये बीमारी

इसके अलावा रोगियों के हाथ मिलाने से भी इसके वायरस का एक-दूसरे में आदान-प्रदान होता है।

By: Abhishek Bissa

Published: 11 Dec 2017, 04:09 PM IST

जोधपुर . मौसम बदलने के साथ ही जोधपुर में एच-१ एन-१ वायरस के रोगियों की संख्या में इजाफा शुरू हो गया है। हकीकत यह सामने आ रही है कि गांव व जोधपुर के आसपास के अन्य जिलों से आने वाले ज्यादातर रोगियों को अपने निकटतम चिकित्सा संस्थान पर समय पर स्वाइन फ्लू का इलाज नहीं मिला। जबकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि स्वाइन फ्लू के लक्षण के तुरंत २४ घंटे में ही मरीज को ओसलटामावीर दवा दे देनी चाहिए। अधिकतर मरीजों की स्थिति बिगडऩे और जोधपुर के आने के बाद ही उन्हें टेमीफ्लू दवा दी जा रही है। इसके अभाव में ही सभी मरीजों ने जोधपुर में आकर दम तोड़ दिया। वहीं रविवार को स्वाइन फ्लू का एक और पॉजिटिव रोगी सामने आया है।

 

वहीं कुछेक जगह गांवों में कई मरीज झोलाछाप चिकित्सकों से उपचार ले रहे हैं। अस्पताल में चिकित्सकों के अनुसार एेसे में कई बार उनका सही इलाज नहीं हो पाता है। मरीज को गंभीरावस्था में जोधपुर लाया जाता है। दो-तीन दिन भर्ती रहने के बाद मरीज की मौत हो रही है। हालांकि कुछ वर्ष पहले पुणे वायरलोजिकल लैब, राज्य व जोधपुर की स्थानीय टीम को भी जोधपुर में स्वाइन फ्लू रोगियों की संख्या बढऩे के पीछे ये प्रमुख कारण नजर आया था। इन दिनों भी चिकित्सक इसी समस्या को स्वाइन फ्लू की मौत का प्रमुख कारण मान रहे है। अभी तक चिकित्सा जगत में स्वाइन फ्लू का समुचित उपचार भी नहीं आया है।

 


शादियों की सीजन में ज्यादा खतरा

 

इन दिनों सावों की सीजन में भी स्वाइन फ्लू रोग फैलने का खतरा बना रहता है। चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू के मरीज के महज छिंकने मात्र से मौजूद सैकड़ों लोगों में स्वाइन फ्लू का वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। जबकि स्वाइन फ्लू का वायरस कम से कम दो से तीन मीटर के दायरे में अपना वायरस फैलाता है। इसके अलावा रोगियों के हाथ मिलाने से भी इसके वायरस का एक-दूसरे में आदान-प्रदान होता है।

 


जिन्हें पहले हो रखा है, वे ज्यादा नहीं डरे

 

जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो चुका है, उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है। अब उनकी बॉडी एच-१ एन-१ वायरस झेलनी की आदी हो चुकी है। घबराने की बात यह है कि स्वाइन फ्लू ने अपना स्टै्रन बदल लिया है, जिस कारण से थोड़ा बहुत खतरा हो सकता है। पहले के रोगियों में अब स्वाइन फ्लू से लडऩे के लिए एंटी बॉडी तैयार हो चुकी है।


बीमार मरीज यूं जाने अपनी कैटेगरी

 

कैटेगरी ए

 

अगर हल्का सा बुखार है और कफ भी है। साथ ही गला खराब होने के साथ बदन दर्द, दस्त और उल्टी हो रही है तो घबराइए नहीं। इसमें एच-१ एन-१ टेस्ट की कोई जरूरत नहीं है। इसमें टेमीफ्लू लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। सिर्फ घर पर आराम कीजिए। भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचिए। गर्भवती, छोटे बच्चे और बुजुर्गों के पास न जाए।


कैटेगरी बी

 

बहुत बुखार है और गले में दर्द है तो आपको भी टेस्ट की जरूरत नहीं है। एेसे समय में आप केवल और केवल टेमीफ्लू टेबलेट का सेवन कर लें। घर में एक अलग कमरे में रहें। इसके लिए विशेष रूप से डॉक्टर से परामर्श लें।


कैटेगरी सी

 

यदि आप में ए और बी दोनों के लक्षण हैं। सांस लेने में भयंकर दिक्कतें आ रही है। सीने में दर्द, रक्तचाप, कफ में से खून आ रहा है और नाखून का रंग आसमानी हो चुका है तो यह कै टेगरी सी के लक्षण है। इस समय में आपको एच-१ एन-१ जांच की विशेष जरूरत है। इसमें विशेष रूप से आपको एंटी वायरल टेबलेट की जरूरत है।

 

इन्हें ज्यादा खतरा


इसमें सर्वाधिक जोखिम ० से ५ आयु वर्ग के बच्चों, ६५ या इससे अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिला, हृदय रोगी व फेफड़े खराब वाले मरीज सहित अन्य गंभीर बीमारियों के रोगियों को हैं। जिन्हें सावधान रहने की जरूरत है।

 

लक्षण पहचानने की जरूरत

 

ज्यादातर रोगियों में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखते ही उन्हें तुरंत उपचार दे देना चाहिए। अधिकतर स्वाइन फ्लू मरीज जोधपुर में गंभीर हालत में आते हैं। इसी कारण मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं। ग्रामीण रोगियों को उपचार के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर के पास जाना चाहिए।


- डॉ. आलोक गुप्ता, वरिष्ठ आचार्य, मेडिसिन विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

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