कहीं समर्थन मूल्य तो कहीं अघोषित विद्युत कटौती के फेर में उलझे किसानों को सरकारी आस, 75 हजार करोड़ का मिलेगा ऋण

सरकारी उलझनों में लटके किसानों को राहत, 75 हजार करोड़ का मिलेगा ऋण

By: Nidhi Mishra Nidhi Mishra

Published: 10 Nov 2017, 12:43 PM IST

सरकार अब किसानों को 75 हजार करोड़ का ऋण देगी। अब तक 57 हजार करोड़ के ऋण किसानों में दिए जा चुके हैं। ये बदलाव वाणिज्यिक बैंकों से मुकाबले के लिए सहकारी बैंकों में किए गए हैं। सहकारिता विभाग ने किसानों का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा बढ़ा कर 600000 कर दिया है। इसे अगले साल तक 1000000 करने की योजना है। तीन साल पहले यह केवल 50000 था। सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में ये सब कह रहे थे। हालांकि किलक का जोधपुर में कोई कार्यक्रम नहीं था। वे अपने विधानसभा क्षेत्र नागौर के डेगाना होते हुए जयपुर जाएंगे। 2 दिनों तक बाड़मेर व जैसलमेर के दौरे के बाद वे देर रात जोधपुर पहुंचे थे।

 

अघोषित विद्युत कटौती से रबी की बुवाई प्रभावित, किसानो में रोष


जोधपुर डिस्कॉम ने मथानिया कृषि क्षेत्र में पुन: अघोषित विद्युत कटौती चालू कर दी है, जिससे रबी फसलों की सिंचाई व बुवाई प्रभावित होने लगी है। किसानों में जोधपुर डिस्काम के प्रति रोष पनपने लगा है।

 

भारतीय किसान संघ के मथानिया-तिंवरी तहसील अध्यक्ष विनोद डागा ने बताया कि रात में 7 घण्टे लगातार किसानों को बिजली देने का वादा करने वाले जोधपुर डिस्कॉम ने अघोषित विद्युत कटौती शुरू कर दी है। विद्युत कटौती के चलते खेतों में रायड़ा, लहसुन, गाजर की सिंचाई व्यवस्था लडखड़़ा गई है। वहीं जीरे की बुवाई में देरी हो रही है। डागा ने बताया कि बार-बार कटौती व एलडी मैसेज के कारण किसानों को पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलते है।

वोल्टेज के उतार-चढ़ाव के कारण किसानों के दो दिन में ही पम्पसेट जलने के मामले बढ़ गए है। मथानिया, रामपुरा, नेवरा रोड, नेवरा, केरला नगर, राजासनी, किरमसरिया, खारडा मेवासा, जुड़, उम्मेदनगर गांवों के किसानों को विद्युत आपूर्ति का ब्लॉक समय गड़बड़ा जाने से किसान परेशान हैं। डागा ने बताया कि विद्युत वितरण निगम के अधिशासी अभियन्ता, अधीक्षण अभियन्ता एक ही रटा-रटाया जबाब दे रहे कि लोड डिस्पेच सेन्टर जयपुर से ही कटौती की जा रही है।

 

समर्थन मूल्य खरीद में फंसे राजस्थान के किसान


सरकार की ओर से गत माह से किसानों को राहत देने के लिए शुरू की गई समर्थन मूल्य पर खरीफ के फसलों की खरीद में अब किसान फंस गया है। सरकारी उलझने व कठोर नियमों के कारण किसान अलग उलझन में फंसता जा रहा है। समर्थन मूल्य पर फसल खरीद में अधिकतम 25 किंवटल खरीद का राइडर मुसीबत बनता जा रहा है। जिन किसानों ने माल बेच दिया, उनका भुगतान नहीं मिल रहा है। किसानों के पास जनधन के बैंक खाते हैं, उनमें यह पैसा जमा नहीं हो रहा है। इसके चलते किसान अब अपनी फसल बेचकर पछता रहे हैं। सरकार इन नियमों के निवारण को लेकर कोई बात सुनने को तैयार नहीं है।

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