दर्द से बेहाल पड़ा मरीज लेकिन अस्पताल में नहीं है चिकित्सक का कोई नामों निशान

मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है लेकिन अस्पताल में चिकित्सकों की कमी होती जा रही है

By: Mahendra Pratap

Published: 13 Mar 2018, 06:11 PM IST

कन्नौज. स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं होता। ये बात हम हमेशा से सुनते आ रहे हैं। लेकिन बदलती जीवनशैला में लोग इस बात पर कम ध्यान दे रहे हैं या फिर यूं कहें कि ध्यान ही नहीं दे रहे। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं। चाहे सरकारी अस्पताल हो या मेडिकल कॉलेज हर जगह का हाल ऐसा है कि मरीज बीमारी से बेहाल है। हर चीज का अस्पताल में इंतजाम है लेकिन फिर भी कुछ खास काम नहीं किया जा रहा। यहां फिजिशियन का कक्ष अक्सर खाली रहता है। 2007 में इस अस्पताल को बनाया गया था लेकिन आज भी यहां काम कुछ खास नहीं किया जाता है।

हर सुविधा है कम

जिला अस्पताल में स्ट्रेचर, दवाएं, बेड समेत मनीजों के उपचार के लिए जो भी चीज चाहिए, वो कम है। मरीजों की संख्या ज्यादा है और सुविधाएं कम हैं। चिकित्सकों और कर्मियों की कमी है। शुरूआत में अस्पताल बिना फिजिशियन के चल रहा था। आज भी हाल कुछ ऐसा ही है।

शासन स्तर पर नियुक्त किया गया लेकिन नहीं किया कभी काम

यहां शासन स्तर पर फिजिशियन डॉ. शिल्पी को नियुक्त किया गया था लेकिन ज्वाइनिंग के बाद से पहले दिन से भी वे नहीं आईं। जिले में अस्पतालों की हालत इतनी बिगड़ी हुई है कि इनकी लापरवाही का सामना मरीजों को करना पड़ता है। ऑपरेशन थिएटर होने के बाद भी कोई सर्जन नहीं है। प्रसव के लिए महिला सर्जन नहीं है। जितनी मरीजो को डॉक्टरों की जरूरत पड़ रही है, उतनी ही परेशानी भी हो रही है। यहां अस्पताल तो हैं, लेकिन सुविधाएं एक भी नहीं हैं।

48 सीनियर चिकित्सकों की हुई है नियुक्ति लेकिन काम करते हैं केवल 3

वहीं, राजकीय मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 105 चिकित्सा शिक्षकों के पद सृजित हैं। इसमें से महज 64 ही तैनात हैं जबकि 41 पद रिक्त है। 19 शिक्षक दूसरे मेडिकल कॉलेजों से संबंद्ध हैं जो प्रतिदिन नहीं आते हैं। नियुक्ति कई सीनियर चिकित्सकों की हुई है लेकिन उसमें से काम पर मुश्किल से 5 भी नहीं लगे हैं।

ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है लेकिन इन्हें देखने वाला कोई चिकित्सक नहीं बैठा रहता। घंटों इंतजार के बाद मरीज वापस घर लौट जाते हैं। किसी को खांसी, तो किसी को उल्टी या फिर बुखार की परेशानी है। लेकिन इनको देखने के लिए चिकित्सक ही नहीं हैं। यहां चिकित्सक की कुर्सी अक्सर खाली पड़ी रहती है। अगर कोई इमरजेंसी केस हो, तो उस स्थिती में भी मरीज को बिना किसी चिकित्सक को दिखाए ही लौट जाना पड़ता है।

Mahendra Pratap
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