अमर दुबे की नाबालिग पत्नी पर 8 धाराएं बढ़ाई गई, कोर्ट ने तीन दिन में मांगे साक्ष्य

अमर दुबे की नाबालिग पत्नी को फिर 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

By: Neeraj Patel

Published: 25 Sep 2020, 04:11 PM IST

कानपुर. 2 जुलाई की रात बिकरू गांव में हुए शूटआउट कांड में साजिशकर्ता बताकर नवविवाहिता खुशी दुबे (अमर दुबे की पत्नी) को जेल भेज दिया था। हालांकि, किशोर न्याय बोर्ड ने खुशी को नाबालिग माने हुए बाल संरक्षण गृह बाराबंकी शिफ्ट करने के आदेश पुलिस को दिए थे। तो वहीं, अब चौबेपुर पुलिस ने गुरुवार 24 सितंबर को उसे बाराबंकी से लाकर माती स्थित किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया। यहां चौबेपुर पुलिस की ओर से बोर्ड को रिपोर्ट देकर मुकदमे में आठ धाराएं और बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई। साथ उसे न्यायिक रिमांड पर भेजने की मांग की। बोर्ड ने उसे फिर 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

बता दें कि इसके पहले पुलिस ने खुशी को हत्या समेत 9 धाराओं में आरोपित किया था। 24 सितंबर को पुलिस की तरफ से दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया गया कि उसे जिन धाराओं में जेल भेजा गया था उसमें कुछ संशोधन किया गया है। विवेचना के दौरान वह और अपराधों में भी दोषी पाई गई है लिहाजा धाराएं बढ़ाई गई हैं। इससे पहले अमर की पत्नी को बलवा, हत्या का प्रयास, हत्या, डकैती, षड्यंत्र रचना, चोरी की गई सम्पत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना और 7 सीएलए में जेल भेजा गया था।

अब इन धाराओं में चलेगा मुकदमा

अब खुशी के खिलाफ 17 धाराओं में मुकदमा चलेंगे। धारा 147, 148, 149 (बलवा), 504 (धमकी देना), 506 (जान से मारने की धमकी देना), 353 (लोक सेवक पर सरकारी कार्य करते समय हमला करना), 332 (लोकसेवक को जानबूझकर गम्भीर चोट पहुंचाना), 333(लोक सेवक को घोर क्षति पहुंचाना), 307 (जान से मारने का प्रयास), 302 (हत्या), 412 (चोरी की गई संपत्ति को बेईमानी से पाना), दफा 34(एक या उससे अधिक लोगों का आपराधिक घटना कारित करना), 7 सीएलए, 3/4 विस्फोटक अधिनियम में मुकदमा चलेगा। पुलिस ने डकैती की धारा 395 हटा दी है। उसकी जगह धारा 396 जोड़ी है जिसके अनुसार डकैती के दौरान हत्या कर देना होता है।

कोर्ट ने मांगे साक्ष्य

खुशी पर वह सभी धाराएं लगाई गई हैं जो विकास दुबे समेत उसके गुर्गों पर लगाई गई हैं। इस पर उसके अधिवक्ता ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि खुशी की भूमिका पुलिस अभी तय नहीं कर पाई है। साथ ही उसके पास से कोई बरामदगी भी नहीं है। ऐसे में नाबालिग को इतने गंभीर आरोपों में कैसे आरोपित कर दिया गया। इस पर कोर्ट ने विवेचक कृष्ण मोहन राय से तीन दिन के अंदर साक्ष्य मांगे हैं।

Neeraj Patel
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