स्वाधीनता सेनानी की जगह इस नेता के नाम पर होगा जीएसवीएम का नया नाम

स्वाधीनता सेनानी की जगह इस नेता के नाम पर होगा जीएसवीएम का नया नाम

Alok Pandey | Updated: 11 Oct 2019, 11:05:12 AM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

‘जीएसवीएम’ से बदलकर अब ‘अग्रिम’ नाम से जाना जाएगा
उच्चीकृत होने के बाद बना रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस

कानपुर। महान पत्रकार और स्वाधीना संग्राम सेनानी रहे गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम पर देश में पहचान बनाने वाले कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का नाम बदल जाएगा। उच्चीकृत होकर मेडिकल कॉलेज से मेडिकल इंस्टीट्यूट बनने के बाद इसका नया नाम होगा ‘अग्रिम’। फरवरी में सार्वजनिक रूप से घोषणा होने के बाद इसे अटल बिहारी जीएसवीएम रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (अग्रिम) के नाम से जाना जाएगा। पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर इसका नामकरण किए जाने के साथ ही इसे देश का नम्बर-वन संस्थान बनाए जाने के प्लान पर काम हो रहा है।

प्राचार्य ने गिनाईं एक साल की उपलब्धियां
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रो. आरती लाल चंदानी ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि एक वर्ष में शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्रों में बड़ा काम हुआ है। 250 सीटें एमबीबीएस की हो गईं। कई विभागों में एमडी और एमएस सीटों को बढ़ाने के लिए एमसीआई की रिपोर्ट का इंतजार है। प्रो. आरती लाल चंदानी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को संस्थान बनाना प्राथमिकता है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने इस दिशा में पहल की है। फरवरी तक इसकी घोषणा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि गर्ल्स यूजी हास्टल और हैलट परिसर के ब्वायज पीजी हास्टल के जीर्णोद्धार का काम हुआ है। आईसीएमआर के सहयोग से कई बड़े रिसर्च के रास्ते खुले हैं।

डोनर न होने पर भी मिलेगा खून
इस दौरान प्राचार्य प्रो. आरती लाल चंदानी बताया कि ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि अगर किसी मरीज के पास डोनर नहीं है तो उसे हरहाल में खून उपलब्ध हो। इसके लिए डोनेशन शिविरों की एक शृंखला शुरू की जाएगी। प्राचार्य ने कहा कि मेडिसिन विभाग में मरीजों का दबाव सबसे अधिक है। इसलिए इसके 50 बेड बढ़ा दिए गए। इसके अलावा आईसीयू में 18 नए वेंटीलेटर लगवाए जा रहे हैं। प्रो. चंदानी ने कहा कि इमरजेंसी में जल्द ही एचएएल के सहयोग से एक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होगी, इसमें 24 घंटे जांच होगी। आईसीयू में लगभग 55 बेड संचालित होने की क्षमता पूरी हो गई।

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