आईआईटी कानपुर बना रहा कोरोना की वैक्सीन, जून में होगा परीक्षण

नतीजे सकारात्मक मिले तो चार महीने बाद इंसानों पर होगा प्रयोग

कानपुर। अब तक की सबसे खतरनाक महामारी कोविड-१९ कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) भी इसी मुहिम में जुटा है। लेकिन संस्थान के विशेषज्ञ दो अलग-अलग तरीके के टीके विकसित करने जुटे हैं। ये टीके कोरोना से डबल सुरक्षा देंगे। दो महीने से आईआईटी की इस कोशिश में काफी हद तक सफलता मिल चुकी है। अब इन टीकों की जून में एनिमल टेस्टिंग (जीव पर परीक्षण) भी शुरू हो जाएगी। अगर सफलता मिली तो चार महीने बाद इसका इंसानों पर भी परीक्षण किया जा सकेगा।

दो तरह के टीके की तैयारी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के बायोलॉजिकल साइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर देब्येंदु कुमार दास व डॉ. सर्वानन मथेस्वरन कोरोना वायरस के खिलाफ टीका बनाने के लिए शोध में जुट गए थे। उन्होंने दिन रात एक करके वैक्सीन पर काम किया। इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेल के इंचार्ज प्रो. अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि यहां पर दो तरह के टीके विकसित करने पर काम हो रहा है। एक कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनाएगा, जिससे संक्रमण की आशंका समाप्त होगी। दूसरे टीके के बारे में अब तक देश में किसी ने नहीं सोचा है।

एंटीबॉडी होगी विकसित
विशेषज्ञ पहली वैक्सीन में अन्य वायरस के माध्यम से शरीर में एंटीबॉडी विकसित करेंगे। उनका दावा है कि यह शरीर को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाएगा। दूसरी वैक्सीन स्ट्रेन बदलने पर भी प्रभावशाली रहेगा। दूसरे संस्थानों से एनिमल टेस्टिंग को लेकर बातचीत भी चल रही है। आइआइटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर का कहना है कि कोरोना वायरस के कांटे (स्पाइक्स) में एस-वन और एस-टू प्रोटीन रहता है। इसी के जरिए ही वह कोशिका (सेल) के संपर्क में आता है। विशेषज्ञों ने एस-टू प्रोटीन पर काम करने का निर्णय लिया है। आइआइटी कानपुर के विशेषज्ञ वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। अभी यह रिसर्च स्टेज में है। जल्द ही बाकी की प्रक्रिया पूरी होगी।

Corona virus
आलोक पाण्डेय
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