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कानपुर

अनशन पर बैठीं मस्कुलरडिस्ट्रोफी पीड़िता, योगी जी इलाज नहीं तो दें मौत की दवा

सुपीमकोर्ट के निर्णय के बाद इच्छामृत्यु के लिए अनशन पर बैठी मां-बेटी

कानपुरMar 11, 2018 / 05:02 pm

Vinod Nigam

सुपीमकोर्ट के निर्णय के बाद इच्छामृत्यु के लिए अनशन पर बैठी मां-बेटी
कानपुर। सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु के फेसले के बाद कानुपर की मां-बेटी जो मस्कुलरडिस्ट्रोफी बीमारी से ग्रसित हैं, रविवार को आमरण अनशन पर बैठ गई। पीड़िताओं की मांग है कि सीएम योगी उनका इलाज कराएं, नहीं तो प्रशासन से कह मौत का इंजेक्शन लगवा दें। अब दर्द बर्दाश्त नहीं हो पा रहा। यदि हमारी फरियाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी सुन लेते तो हम इस दुनिया को छोड़ गए होते। पीड़ित मां ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तिल-तिल कर रोज मर रही है, अच्छा होगा कि सरकार और प्रशासन हमें इस शरीर से मुक्ति दिला दे।
बेटी भी लाइजाल बीमारी की चपेट में आई
शहर के शंकराचार्य नगर निवासी शशि मिश्र के पति की 15 साल पहले मौत हो चुकी है। शशि मस्कुलर डिस्ट्राफी नाम की बीमारी से पीड़ित हैं जिसकी वजह से चलने फिरने में असमर्थ हैं। वह बीते 27 साल से बेड पर है । वही 6 साल पहले इकलौती बेटी अनामिका मिश्रा (33) भी इसी बीमारी की चपेट में आकर लाचार हो गई। शशि के मुताबिक बेटी के इलाज में घर में रखी जमापूंजी भी खत्म हो गई रिश्तेदारों ने मदद की लेकिन बाद में उन्होनें भी किनारा कर लिया। हमने केंद्र व राज्य सरकारों से मदद की गुहार लगाई पर किसी ने सुधि नहीं ली। अब स्थिति यह है कि बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया है। हमने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को खून से खत लिखकर इच्छामृत्यु देने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने हमारी मां को ठुकरा दिया। कोर्ट के निर्णय के बाद आस जगी है कि बेदर्द शरीर से छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन प्रशासन हमें मौत का इंजेक्शन देने से कतरा रहा है। अगर मौत नहीं दे सकते तो हमारा इलाज ही करवा दें।
1985 में इस बीमारी ने जकड़ा
मौजूदा समय में परिवार के रिश्तेदारों ने भी कन्नी काट ली है। मां-बेटी मोहल्ले के लोगों के रहमोकरम पर जीने का मजबूर हैं। अपनी लाचारी से ऊब कर अनामिका जो की बी कॉम की पढ़ाई पूरी कर चुकी है। अनामिका ने बताया कि मेरे पिता एक बिजनेस मैन थे। मेरी माँ की अचानक सन 1985 में तबियत ख़राब हुई थी। तब हमें पता चला था कि इनको मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक बीमारी है। जब तक पिता थे उन्होंने इलाज कराय। उनके निधन के बाद घर की जमा पूंजी व् जमीन बेच कर हम इलाज कराते रहे । मैंने स्कूल में पढाया और कोचिंग पढ़कर माँ का इलाज कराया और घर के खर्चे चलाये स लेकिन अब इस बीमारी ने मुझे भी अपनी चपेट में ले लिया चार साल से मै भी बिस्तर पड़ी हूं। अनामिका और उनकी माँ अपने समुचित इलाज किये जाने या फिर इच्छामृत्यु दिए जाने की माग को लेकर घर पर अनशन पर बैठ गयी हैं। उनका कहना है की सरकार उनका पूरा इलाज करवाए अगर इलाज न हो सके तो उन्हें मौत का इंजेक्शन लगा दे।
घर नहीं, श्मशान जाएगा शरीर
पीड़ित मां और बेटी का कहना है कि अगर सरकार इलाज नहीं करवाती तो यहीं पर दम तोड़ देंगे, पर घर के अंदर नहीं जाएंगे। फेसला सरकार और जिला प्रशासन को करना है कि वह मौत देंते हैं यर दवा। पीड़ित मां ने कहा कि कोर्ट ने हमारे पक्ष में फेसला सुनाया है, जिसे जमीन पर लाने का काम सरकार और प्रशासन का है। वहीं व्यापार मंडल के नेता ज्ञानेंद्र मिश्रा ने कहा कि हम सीएम योगी से मांग करते हैं कि मां-बेटी का इलाज करवाएं और उनकी मदद के लिए जिला प्रशासन को आदेश दें। हम सोमवार को डीएम सुरेंद्र सिंह मिलेंगे और पीड़िताओं के इलाज करवाए जाने की मांग करेंगे। बावजूद मदद नहीं की गई तो उद्याग मंडल इन्हें मरने नहीं देगा। अपने पैसे से इलाज करवाएगा और शासन-प्रशासन के खिलाफ आंदोलन चलाएगा।
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