हैलट में ऑक्सीजन का संकट, चौबीस घंटे का बैकअप नही, कोरोना मरीजों से बढ़ी ऑक्सीजन खपत

आक्सीजन गैस प्लांट संचालक जरूरत के हिसाब से एक चौथाई आक्सीजन भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जबकि कोरोना के तमाम मरीजों को निमोनिया, फेफड़ों में पानी भरने के कारण सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 18 Apr 2021, 01:35 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. कोरोना संक्रमण (Corona Virus In UP) जिस तरह बढ़ रहा है। उसके मुताबिक स्वास्थ सेवाएं (Health Facility In Covid) नाकाफी साबित होती नजर आ रही है। कानपुर कोविड अस्पतालों (Covid Hospital) में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा तो दूसरी तरफ ऑक्सीजन (Oxygen Crisis In Covid Hospital) का संकट बढ़ता जा रहा है। संक्रमण बढ़ने के चलते ऑक्सीजन की खपत बढ़ने पर मांग करीब बीस गुना बढ़ गई है। बावजूद आक्सीजन गैस प्लांट संचालक जरूरत के हिसाब से एक चौथाई आक्सीजन भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जबकि कोरोना के तमाम मरीजों को निमोनिया, फेफड़ों में पानी भरने के कारण सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे में मरीजों को आक्सीजन सिलिंडर (Oxygen Cylinder) नहीं मिल पा रहे हैं।

सबसे ज्यादा संकट हैलट के कोविड अस्पतालों में है। मिली जानकारी के मुताबिक हैलट में 24 घंटे का भी आक्सीजन बैकअप नहीं बचा है। जबकि 48 या 72 घंटे का बैकअप होना चाहिए। कुछ बहुत राहत देने के लिए हमीरपुर से 100 सिलिंडर मंगाए गए हैं। जबकि हैलट के न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल और मैटरनिटी विंग के अस्पताल में 150 कोरोना रोगी भर्ती हैं। इनमें 90 फीसदी रोगी आक्सीजन सपोर्ट पर हैं। आक्सीजन सेच्युरेशन लेवल कम होने से रोगियों को हाई फ्लो के साथ आक्सीजन देनी पड़ रही है।

हैलट (Hailat Hospital) में देहरादून से एक आक्सीजन का टैंकर रोज आता है। इसमें 30 से 35 हजार लीटर लिक्विड आक्सीजन होती है। यहां पर लिक्विड आक्सीजन के तीन प्लांट हैं। इनकी क्षमता नौ हजार लीटर की है। एक प्लांट से न्यूरो साइंसेज, दूसरे वार्डों और तीसरे मैटरनिटी विंग को आक्सीजन जाती है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि आक्सीजन का 24 घंटे का बैकअप नहीं बचा है। एनेस्थीसिया विभाग से आक्सीजन की खपत का ब्योरा मांगा गया है।

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