यूपी पुलिस का अजब खेल, पत्नी की हत्या के आरोप में पति को ही भेज दिया जेल

Nitin Srivastava

Publish: Sep, 17 2017 08:14:11 (IST) | Updated: Sep, 17 2017 01:25:37 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
यूपी पुलिस का अजब खेल, पत्नी की हत्या के आरोप में पति को ही भेज दिया जेल

जब पत्नी को होश आया तो उसे पुलिस की करतूत पता चली तो वो भागकर एसएसपी से मिली और पूरी वारदात की जानकारी दी।

कानपुर. सीएम योगी आदित्यनाथ पुलिस की शक्ल, सूरत और वर्दी को बदलने के लिए लगे हुए हैं, लेकिन खाकीधारी हैं कि अपना रवैया बदलने को तैयार नहीं। जिस पति ने अपनी जख्मी पत्नी को इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट करवाया और उन पर जानलेवा हमले के साथ ही लूट की तहरीर दी, उसे ही आरोपी बनाकर जुर्म कबूल करवाकर जेल भेज दिया गया। एक सप्ताह में जब पत्नी को होश आया तो उसे पुलिस की करतूत पता चली तो वो भागकर एसएसपी से मिली और पूरी वारदात की जानकारी दी। लेकिन खाकी को बचाने के लिए सीएम की सिंघम ने पीड़िता की फरियाद को नहीं सुना। वो बड़े-बड़े अफसरों के दर पर जाकर फरियाद करती रही पर कहीं उसकी सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उसने हारकर न्यायालय की शरण में जाने की मन बनाया और शनिवार को एक एफिडेविट के पुलिस की पोल खोली।

 

महिला पर हुआ था जानलेवा हमला

बर्रा थाना क्षेत्र के तात्याटोपे नगर में रहने वाले प्रवीण कुमार श्रीवास्तव नगर निगम जोन चार में अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात हैं।।7 सितम्बर को प्रवीण मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के कार्यक्रम में अपनी ड्यूटी पर मोतीझील में मौजूद थे। प्रवीण जब घर पहुंचे तो उनकी पत्नी घायल अवस्था में अपने पलग पर पड़ी हुयी थीं।प्रवीण ने उनको प्राइवेट नर्सिंगहोम में भर्ती कराया जंहा पर उन्हें आईसीयू में रक्खा गया था। पुलिस ने अटेम्ट-टू-मर्डर व लूट के मामले का खुलासा करे हुए पति प्रमीण कुमार आर इनके रसोइए को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। विभा इलाज के बाद जब घर पहुंची तो उन्हें पता चला के इस घटना के आरोप में पुलिस ने उनके ही पति को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया तो वो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस-प्रशासन के अफसरों से की। लेकिन जब उनको कोई सुनवाई नहीं हुयी तो उन्होंने न्यायालय में पति के पक्ष में शपथ पत्र दाखिल किया।


बेटा बोला गुडवर्क के चलते पिता को जेल भेजा

प्रवीण का बड़ा बेटा मर्चेंट नेवी में नौकरी करता है और वह अक्सर देश से बाहर रहता है जबकि उनका छोटा बेटा निशांत गाजियाबाद में बीटेक की पढाई कर रहा है। निशांत को जब इस घटना की जानकारी हुयी तो वह अपने घर पहुंचा। निशांत का कहना है की जब नर्सिंग होम में जाकर मम्मी से पूछा की ऐसा कैसे हो गया तब उन्होंने बताया की इसमें अंकित और गोलू का हाथ है पुलिस ने जांच करने के बाद मेरे पापा को जेल भेज दिया जबकि वह निर्दोष हैं निशांत का कहना है की अब पुलिस पर से भरोषा उठ गया है अब अपने पापा को निर्दोष साबित करने के लिए कोर्ट का सहारा ले रहे हैं मेरे पापा और मम्मी किसी तरह का कोई तनाव नहीं था। प्रमीण के साथ काम रने जगमोहन सिंह सेंगर का कहना है की प्रवीण जी सीधे साधे और अच्छे आदमी थे उनपर पुलिस ने इस तरह का केस दर्ज करके उनको जेल भेजा है वो ऐसा नहीं कर सकते सात तारीख को मुख्यमंत्री जी को आना था और वो उस कार्यक्रम में व्यस्त थे।


पुलिस की गढ़ी कहानी में कई पेंच

अधिवक्ता सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि पुलिस की इस कहानी में काफी पेंच है। पुलिस ने आरोपी गोलू के बयान, प्रमीण ने अपनी पत्नी की हत्या करने के लिए दो लाख की सुपारी दी थी, आरोपी बनाया है। वकील ने बताया, अगर उन्होंने अपनी पत्नी को मरने की सुपारी दी होती तो वह उनको वहीं मौके पर ही मार देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं करते हुए अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए उनको नर्सिंगहोम में भर्ती कराया। अधिवक्ता का कहना है की पुलिस ने गोलू का जो बयान लिया है वह वैधानिक व्यवस्था के विपरीत है क्योकि धारा 161 के बयान का कोई महत्व नहीं है। इस घटना में अगर विवेचक चाहता तो गोलू का धारा 164 का कलम बंद बयान करवा सकता था लेकिन विवेचक ने जान बूझकर ऐसा नहीं किया। क्यांकि गोलू न्यायालय में जो सच था वही बताता और अभियोजन की कलई खुल जाती।

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