Rasulabad Assembly Constituency: इस सीट पर सपा, बसपा और भाजपा तीनों ने मारी बाजी, वर्तमान में बीजेपी काबिज, जानें सीट का इतिहास

Rasulabad Assembly Constituency परिसीमन के बाद इस सीट पर सपा और भाजपा ने जीत दर्ज की, विधानसभा चुनाव 2022 में इस सीट पर घमासान चुनाव होने का अनुमान है।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 10 Sep 2021, 07:24 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर देहात. Rasulabad Assembly Constituency जिले की सबसे अहम रही डेरापुर विधानसभा (Derapur Assembly Seat) सीट के बाद नए परिसीमन में 2012 में रसूलाबाद विधानसभा (Rasulabad Assembly Seat) सीट घोषित की गई। यहां 2012 के चुनाव (UP Assembly Election 2022) में सपा व बसपा में चुनाव घमासान हुआ। जिसमें सपा से शिवकुमार बेरिया ने 66,940 वोट पाकर बसपा की महिला प्रत्याशी निर्मला संखवार को 16,835 मतों से शिकस्त दी थी। जिसके बाद प्रदेश में सपा की सरकार बनते ही उन्हें रेशम व वस्त्र उद्योग का मंत्रालय सौंपकर कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की लहर में निर्मला संखवार ने भाजपा का दामन थामकर चुनाव जीत लिया। इसके पहले विधानसभा डेरापुर रहने पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति मतदाताओं की संख्या अधिक रही है। फिलहाल विधानसभा 2022 को लेकर सपा से कई दिग्गज दावेदारी की चर्चा में हैं। वहीं वर्तमान में भाजपा से निर्मला संखवार विधायक (MLA Nirmala Sankhwar) हैं।

इस सीट पर प्रत्याशियों में हमेशा रहा रोमांचक मुकाबला

इस रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग बहुतायत में है। फिर भी इस सीट पर सपा और भाजपा बारी बारी से जीती। जबकि डेरापुर में सपा, बसपा और भाजपा बारी बारी से जीती है। वहीं डेरापुर सीट से जनता दल से भगवानदीन कुशवाहा ने 5 बार विधायक बनकर इतिहास रचा था। जो तीन बार लगातार विधायक बने, इसके बाद दो बार फिर चुने गये। जबकि एक बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। जबकि 2007 के चुनाव में बसपा से महेश त्रिवेदी ने जीत का परचम लहराया था और उन्हें मंत्री पद सौंपा गया था। वहीं 2002 में सपा से कमलेश पाठक विधायक बने। इसके पहले 1996 में भाजपा से जीत हासिल करने वाले देवेंद्र सिंह उर्फ भोले को स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनाया गया था। जो वर्तमान में अकबरपुर लोकसभा से भाजपा सांसद भी हैं। 1980 में कांग्रेस के रामपाल ने अपनी जीत दर्ज की थी।

सपा और भाजपा के बीच बना था जंग का मैदान

विधानसभा चुनाव 2002 में दो दिग्गजों ने चुनाव लड़ा। जिसमें दोनों आमने-सामने हो गये। समाजवादी पार्टी से कमलेश पाठक व भाजपा से भोले सिंह चुनाव मैदान में उतरे। लेकिन यह चुनाव का मैदान चुनाव प्रचार के दौरान जंग का मैदान बन गया। जिसमें दोनो तरफ से झींझक क्षेत्र मे गोलियां चलीं। जिसके बाद जातिगत मतदाताओं ने एकजुट होकर कमलेश पाठक को विधायक चुना। इसके पूर्व 1996 में भोले सिंह ने भाजपा से जीत दर्ज की थी। इसके पूर्व सपा से आरडी. पाल और फिर भोले सिंह विधायक बने। इस तरह इस क्षेत्र में कभी कमल खिला तो कभी साइकिल चली।

रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं

जिले की इस विधानसभा सीट का बड़ा क्षेत्र होने के चलते गांव की संख्या ज्यादा है। बहुतायत में पिछड़े गांव हैं। गांव के लिए जर्जर संपर्क मार्ग एवं बिजली की समस्या प्रमुख है। इस विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा वीआईपी लोकसभा कन्नौज में आता है। इस सीट पर दिग्गज नेताओं की निगाहें करम रहती हैं। इसलिए इस सीट पर आगामी विधानसभा 2022 में चुनाव जोरदार होने का अनुमान है।

इस क्षेत्र में आंकड़ों के मुताबिक मतदाता

रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में 2017 चुनाव के अनुसार कुल मतदाताओ की संख्या 27,1763 है। इसमें पुरुष मतदाता करीब 16,0340 हैं और महिला मतदाता 1,11,423 हैं। जो क्षेत्र से अपने प्रतिनिधि का चयन करते हैं।

किस दल का कौन नेता

पिछले 2017 के चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद अबकी बार इस सीट पर दावेदारों के कई चेहरे सामने आने की उम्मीद है, हालांकि सपा से कई दावेदार क्षेत्र में मतदाताओं के संपर्क में अभी से जुटे हैं। फिलहाल अभी किसी भी राजनीतिक दल ने अपना प्रत्याशी घोषित भी किया है।

अभी तक जीते प्रत्याशी

2012- शिवकुमार बेरिया- सपा
2007- महेश त्रिवेदी- बसपा
2002- कमलेश पाठक- सपा
1996- देवेंद्र सिंह उर्फ भोले- भाजपा
1993- आरडी पाल- सपा
1991- देवेंद्र सिंह उर्फ भोले- भाजपा
1989- भगवानदीन कुशवाहा- जनता दल
1985- भगवानदीन कुशवाहा- जनता दल
1980- रामपाल- कांग्रेस
1977- भगवानदीन कुशवाहा- जनता दल
1974- भगवानदीन कुशवाहा- जनता दल

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