अंधे हो गए शिवपाल, पति को बचा लो साहब

दूलगांव के ग्रामीण हैलट में एडमिट, डीएम सुरेंद्र सिंह ने पीड़ितों के परिजनों से पूछा हाल

By: Vinod Nigam

Published: 20 May 2018, 06:08 PM IST

कानपुर। साहब पति की आंख की रोशनी चली गई है। वो खड़े होते हैं तो पेट में दर्द होता है जिसके कारण कई बार बेहोश हो जाते हैं। गांव के कुछ लोगों के साथ ठेके पर गए थे और शराब खरीद कर पी थी। पेट में जाते ही एकाएक आंख की रोशनी चली गई और वह जमीन पर गिर गए। सूचना मिलते ही पति को लेकर हैलट अस्पताल आए, पर 24 घंटे से ज्यादा का समय बीत गया, पति ठीक नहीं हुए। यह शब्द दूलगांव निवासी मंजू सिंह ने कानपुर डीएम सुरेंद्र सिंह से कहे। मंजू ने बताया कि शुक्रवार की रात गांव के कई लोगों ने शराब का सेवन किया। सबकी तबियत खराब हो गई तो उन्हें लेकर कल्याणपुर सीएचसी पहुंचे। जहां हालत गंभीर होने पर उसके पति शिवपाल सिंह को डॉक्टरों ने हैलट अस्पताल रेफर कर दिया, यहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
एक दर्जन लोग हैलट में एडमिट
सचेन्डी में शनिवार की सुबह भायनाक घटना हो गई। जहरीली शराब पीने से रिटायर्ड दरोगा समेत छह लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक लोगों की आंखों की या तो रोशनी चली गई है या फिर उन्हें दिखना कम हो गया है। सूचना पर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। पीड़ितों को हैलट अस्पताल भेजा गया है। दूलगांव निवासी शिवपाल का इलाज हैलट आईसीयू में चल रहा है। डीएम सुरेंद्र सिंह जहरीली शराब के सेवन से बीमार पड़े लोगों को देखने के लिए हैलट पहुंचे। यहां शिवपाल की पत्नी ने डीएम के पैर पकड़ कर लिपट गई और रोने लगी। मंजू ने बताया कि साहब पति की आंख की रोशनी चली है। इलाज के बाद भी कुछ फाएदा नहीं हो रहा। डॉक्टरों के कह कर ठीक से इलाज करवाएं, जिससे की पति की जिंदगी बच सके। डीएम ने हैलट के डॉक्टरों को निर्देश दिए कि हर बीमार की ठीक से इलाज करें।
बच्चों को भी बना दिया शराब का लती
दूल गांव के जिस ठेके की शराब पीने के बाद छह लोगों की जान चली गई, उसका मालिक सरकारी आदेशों को दरकिनार कर 24 घंटे ठेका चला रहा था। दिखावे के लिए बाहर ताला लगा रहता था, जबकि खिड़की से सप्लाई की जाती थी। किशोरों को शराब बेचने पर पाबंदी है लेकिन गांवों के 12-14 वर्ष के किशोर खुलेआम ठेके से शराब लेकर वहीं पीते थे। मंजू ने डीएम को बताया कि सुबह पांच बजे से लेकर देर रात दो-तीन बजे तक ठेके के पास लोगों को शराब पीते देखा है। स्कूल जाने वाले कई किशोर भी ठेके से शराब लेकर खेत पर जाकर पीते थे तो कई रात के अंधेरे में ठेके में ही पैग लड़ाते थे। सेल्समैन से इसका विरोध किया लेकिन वह झगड़े पर आमादा हो जाता था। ठेका मालिक श्याम बालक से भी कहा लेकिन उसने भी अनसुना कर दिया। उसने कहा, ऊपर तक पैसा पहुंचाते हैं, किसी की हिम्मत नहीं कि ठेका बंद करा दे। साहब छह लोगों की मौत के हत्यारे ठेके को बंद कराने का आदेश दें।
रूरा से आई थी शराब की खेप
मंजू के भाई ने किशन ने बताया कि जिस मिलावटी शराब के पीने से इतनी बड़ी घटना हुई वह 17 तारीख को रूरा से आई थी। बताया कि एक लोडर से करीब 10 पेटी शराब उतारी गई थी। इससे पहले सेल्समैन स्टॉक कम होने की बात कह रहा था। ठेके का सेल्समैन दो तरह का माल रखता था। नए व्यक्ति को असली पौवा देता था। इसके बाद जब पीने वाला और मांगता तो उसे मिलावटी माल दिया जाता था। इससे शराब ज्यादा चढ़ती थी। वहीं गांव के रोजाना के ग्राहकों को मिलावटी माल ही दिया जाता था। हमलोगों ने इसकी शिकायत जब सजेंडी पुलिस से की तो उल्टा पुलिसवाले हमें जेल भेजने की धमकी देकर भगा देते थे। सेल्समैन हर माह थाने में पैसे पहुंचाता था। इतना ही नहीं शाम के वक्त पुलिस की मौजूदगी में शराब की बिक्री सेल्समैन करता था।

Vinod Nigam
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned