अब स्टेम सेल से तैयार होगी हड्डी और देगी नई जिंदगी

बोन कैंसर, एक्‍सीडेंट या बीमारी के चलते शरीर के किसी भी हिस्‍से की हड्डियां गवां चुके लोगों के लिए उम्‍मींद की नई किरण जगी है. आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्‍ली के वैज्ञानिकों ने स्‍टेम सेल के थ्री-डी बायोप्रिंटिंग तकनीक से इंसान के शरीर के लिए नई हड्डियां तैयार करने में काफी हद तक सफलता पा ली है.

कानपुर। बोन कैंसर, एक्‍सीडेंट या बीमारी के चलते शरीर के किसी भी हिस्‍से की हड्डियां गवां चुके लोगों के लिए उम्‍मींद की नई किरण जगी है. आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्‍ली के वैज्ञानिकों ने स्‍टेम सेल के थ्री-डी बायोप्रिंटिंग तकनीक से इंसान के शरीर के लिए नई हड्डियां तैयार करने में काफी हद तक सफलता पा ली है.

बताया गया है कि…
इसको लेकर वैज्ञानिकों ने अपना शोध पूरा कर लिया है. अब इसका क्‍लीनिकल ट्रायल किया जाएगा. ट्रायल सफल होते ही इंसान के शरीर में इसका प्रत्‍यारोपण किया जा सकेगा. ऐसा होने पर मेडिकल क्षेत्र के लिए ये एक बड़ी उपलब्‍धि होगी. इंसान की नई हड्डियां तैयार करने की तकनीक पर दुनियाभर के कई बड़े वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. शोधकर्ताओं का इसको लेकर दावा है कि दुनिया में पहली बार इस तकनीक से नई हड्डियां बनाने में सफलता मिली है.

ऐसे तैयार होगी आर्टीफीशियल हड्डी
आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर अमिताभ बंदोपाध्‍याय और आईआईटी दिल्‍ली के प्रो. सौरभ घोष ने इसपर रिसर्च किया है. प्रो. बंदोपाध्‍याय ने इस बारे में बताया है कि इंसान के शरीर में दो तरह की हड्डियां होती हैं. दोनों गर्भ में भ्रूण विकास के दौरान ही तैयार होती है. इनमें से एक मस्‍तिष्‍क को कवर करने वाली स्‍कल होती है, जो सेल से तैयार होती है. वहीं दूसरी होती है इंसान वो जो इंसान के शरीर को पूरा उठाती है. ये हाथ, पैर और रीढ़ में विकसित होती है. इसके लिए पहले स्‍टेम सेल से कार्टिलेज तैयार होता है. इससे थ्री-डी बायोप्रिंटिंग तकनीक का इस्‍तेमाल कर हड्डी तैयार होती है. यह तकनीक शरीर के जिस हिस्‍से में हड्डी का प्रत्‍यारोपण करना होता है, उसका आकार तय करती है.

थ्री डी प्रिंटिंग से तैयार होगी हड्डी की शेप
प्रो. बंदोपाध्‍याय ने इस बारे में बताया है कि हड्डी तैयार करने से पहले ये मालूम होना चाहिए कि शरीर के जिस हिस्‍से की हड्डी गायब है, उसका आकार और प्रकार कैसा है. इसको थ्री डी बायोप्रिंटिंग से ही तैयार किया जा सकता है. इस तकनीक को आईआईटी दिल्‍ली के प्रोफेसर सौरभ घोष ने तैयार किया है.

आलोक पाण्डेय
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