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कानपुर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस अस्पताल में सीपीआर और बैलेंस को लेकर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की तरफ से इसके विषय में जानकारी दी कि जिसका प्रशिक्षण मानव पुतले पर दिया गया। इस मौके पर बताया गया कि जानकारी के साथ प्रशिक्षण आवश्यक है। बिना प्रशिक्षण के कारगर उपचार नहीं किया जा सकता है। एजेंसी की स्थिति में शुरुआत के 3 मिनट काफी महत्वपूर्ण होते हैं। कार्यक्रम का नाम दिया गया "3 मिनट जिंदगी के"। बताया गया कि मनुष्य को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन आवश्यक तत्व है और यदि 3 मिनट तक ऑक्सीजन न मिले तो मस्तिष्क में क्षति प्रारंभ हो जाती है।
इस संबंध में डॉ अमित गुप्ता ने बताया कि मार्ग दुर्घटना, हार्ट अटैक, सीवर लाइन की सफाई, करंट आदि जैसी घटनाओं में मृत्यु के विषय में पढ़ते रहते हैं। इनमें कुछ मृत्यू घटनास्थल पर ही हो जाती है। वहीं काफी लोग अस्पताल पहुंचते पहुंचते हमेशा के लिए आंखें मूंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि आकस्मिक मृत्यु से लोगों को बचाया जा सकता है। यदि पास खड़े लोगों को सीपीआर या बीएलएस के बारे में जानकारी हो। वह ऐसी परिस्थितियों में बड़े लोगों की जान बचाने की कोशिश कर सकता है और उसे सुरक्षित अस्पताल पहुंचा सकता है। इसके लिए शुरूआत के 3 मिनट बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं।
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कार्यशाला का आयोजन
इसी संदर्भ में प्रशिक्षण देने के लिए केएचआईएमएस हॉस्पिटल बड़ा चौराहा में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर डॉ सुनीत गुप्ता, डॉ प्रदीप टंडन डॉक्टर अमित कुमार ने कार्यशाला में मौजूद पुलिसकर्मियों विभिन्न संगठन के पदाधिकारियों समाजसेवी व आम जनता को मानव पुतले पर सीपीआर और बीएलएस का प्रशिक्षण दिया। सहयोग देने वालों में पूर्व सीएमओ डॉ वीसी रस्तोगी, वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ हेमंत मोहन, डॉक्टर आरती मोहन, डॉ अमित कुमार, डॉ नेहा सिंह, विकास सिंह अग्रहरी आदि मौजूद थे।
Published on:
28 Mar 2022 08:12 am
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