कैलादेवी-धौलपुर के बीच नए कॉरीडोर बनाने के संकेत

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By: Dinesh sharma

Updated: 02 Mar 2019, 11:28 AM IST

दिनेश शर्मा
करौली. सुल्तान-सुंदरी के जोड़े से इन दिनों आबाद हो रहे कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र के विकास को लेकर नए कॉरीडोर बनाने की योजना पर वन विभाग में मंथन चल रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र के धौलपुर इलाके तक एक नए कॉरीडोर से जुडऩे की उम्मीद की जा रही है।

इससे यह अभयारण्य विकास की नई राह पर दौडऩे लगेगा। वन अधिकारियों ने इस दिशा में कवायद शुरू कर दी है। ऐसा होने पर इस इलाके में बाघों की संख्या में भी इजाफा होने की उम्मीद की जा रही है।

35 किलोमीटर का होगा नया कॉरीडोर
विभागीय सूत्र बताते हैं कि मण्डरायल नींदर क्षेत्र से धौलपुर के झिरी केसर बाग सैन्चुरी तक 35 किलोमीटर का नया कॉरीडोर बनाने की योजना है। इस पर स्थानीय अधिकारियों द्वारा प्रस्ताव भेजने के बाद विभाग के उच्च स्तर पर भी चर्चा की गई है। अधिकारियों का मानना है कि कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र बाघों के लिए हर दृष्टि से अनुकूल है। करीब 72 हजार 131 हैक्टेयर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य क्षेत्र बाघों के लिए आदर्श आश्रय स्थल बन सकता है। नए कॉरीडोर बनने से इस क्षेत्र में बाघों की संख्या में वृद्धि होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इतना ही नहीं बाघों की बढ़ती संख्या के कारण स्थान का अभाव झेल रहे रणथम्भौर राष्ट्रीय अभयारण्य से भी बाघों का दबाव कम होगा। गौरतलब है कि फिलहाल रणथम्भौर अभयारण्य में करीब 65 बाघ हैं।


कैलादेवी में अभी चार बाघ
यूं तो कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र दशकों से विकास की बाट जोह रहा है। इसका एक कारण यह भी था कि यहां बाघों का स्थायी ठिकाना नहीं बन पा रहा था। लेकिन वर्ष 2016 में बाघ टी-72 (सुल्तान ) के इस इलाके में कदम पड़े तो उसे इलाका रास आने लगा। वहीं सुन्दरी यानि टी-92 बाघिन को भी कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र भा गया है। सुल्तान-सुंदरी की जोड़ी की दहाड़ वन क्षेत्र में लगातार गूंज रही है। इस जोड़े ने करीब एक वर्ष पहले दो शावकों को जन्म देकर जंगल में खुशखबरी भी फैलाई। साथ ही अभयारण्य के विकास की संभावनाओं को मजबूती दी। इस जोड़ी को विशेष रूप से मण्डरायल के समीप नींदर वन खण्ड रास आया हुआ है। अधिकांश समय सुल्तान-सुंदरी ने इसी इलाके में गुजारा है। इन दिनों भी यह जोड़ा अपने शावकों के साथ इसी क्षेत्र में विचरण करता घूम रहा है।

तूफान के नहीं ठहरते कदम
कैलादेवी के अभयारण्य में तूफान के भी तूफानी दौरे होते हैं। टी 80 के नाम का यह टाइगर रणथम्भौर अभयारण्य क्षेत्र से आए दिन इधर चला आता है लेकिन इसके तूफानी दौर होते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वह रणथम्भौर अभयारण्य से घूमता हुआ बनास नदी के रास्ते इस इलाके में आता रहा है। उसके कदम करणपुर क्षेत्र के खोह, निभैरा इलाके तक ही पड़ते हैं। तूफान को भी यह इलाका रास तो आ रहा है, लेकिन स्थायी ट्रेरट्री नहीं बना पा रहा।

बन सकता है नया कॉरीडोर
कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र के मण्डरायल नींदर इलाके से धौलपुर झिरी केसर बाग सैन्चूरी तक नया कॉरीडोर बन सकता है। इस संबंध में विभागीय उच्चाधिकारियों से चर्चा की है। ऐसा होने से कैलादेवी अभयारण्य विकसित हो सकेगा।
कपिल चन्द्रावल, उपवन संरक्षक, कैलादेवी अभयारण्य

Dinesh sharma Reporting
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