covid-19 संक्रमण से बच न सका देश के पहले उड़ता जंक्शन का निर्माण

मार्च 2023 तक पूरा होने वाले कटनी ग्रेड सेपरेटर का काम अब अगस्त 2023 तक पूरा होने की उम्मींद.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 28 Sep 2021, 11:53 AM IST

राघवेंद्र चतुर्वेदी @ कटनी. कोविड-19 संक्रमण से जब पूरी दुनिया में विकास की गति पर असर पड़ा तो भला कटनी में निर्माणाधीन देश के पहले उड़ता जंक्शन (कटनी ग्रेड सेपरेटर) का निर्माण भला इससे कैसे अछूता रह जाता। कोरोना की पहली और दूसरी लहर का असर भारतीय रेलवे के इस मेगा प्रोजेक्ट पर भी पड़ा।

कटनी ग्रेड सेपरेटर निर्माण से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि मार्च 2023 में पूरी होने वाली परियोजना का अब अगस्त 2023 तक पूरा होने की संभावना है। हालांकि पश्चिम मध्य रेलवे जोन के सीपीआरओ राहुल जयपुरियार इस बारे में संबंधित विभाग से जानकारी लेकर ही कुछ बताने की बात कह रहे हैं।

इसलिए कहते हैं उड़ता जंक्शन-
कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना रेलवे की मेगा परियोजनाओं में से एक है। इसमें अप और डाउन दोनों ही लाइन में क्रमश: 16.08 और 18.01 किलोमीटर लंबी रेल ओवरब्रिज का निर्माण होगा। इसमें अप लाइन में झलवारा से एक लाइन आएगी और दूसरी कटंगीखुर्द की ओर से आएगी। दोनों लाइन आरओबी में उपर ही उपर पड़रिया फाटक के पास मिलेगी और आगे मझगवां तक जाएगी। डाउन लाइन में मझगवां की ओर से आरओबी में आने वाली लाइन बिमरौल नदी पर जमीन से कटंगीखुर्द की ओर चली जाएगी और यहीं पर एक लाइन व्हायाडक्ट से झलवारा की ओर जाएगी। यानी दोनों ही लाइन में आरओबी में पड़रिया फाटक और बिमरौल नदी के पास जंक्शन होगा। आरओबी में उपर ही उपर जंक्शन होने के कारण इस परियोजना को उड़ता जंक्शन कहा जा रहा है।

काम पूरा होने से रेलयात्रियों को बड़ी राहत-
कटनी जंक्शन देश के बड़े रेलवे जंक्शनों में से एक है। यहां एनकेजे रेलवे का बड़ा यार्ड है। इस कारण कोयला लोड मालगाड़ी की आवाजाही के कारण अमूमन यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होता है और ट्रेनें अनावश्यक विलंब से चलती हैं। भारतीय रेल ने कई ट्रेनों की टाइमिंग में भी 10 किलोमीटर के लिए 40 से 50 मिनट तक अंतर रखी है। कटनी ग्रेड सेपरेटर के निर्माण के बाद सिंगरौली और बिलासपुर की ओर से आने वाली कोयला लोड मालगाड़ी ओवरब्रिज से सीधे बीना लाइन पर मझगवां तक जाएगी और इससे कटनी मुख्य रेलवे स्टेशन, कटनी मुड़वारा और कटनी साउथ स्टेशन में रुकने वाली ट्रेनों के साथ ही इन यात्री ट्रेनों में यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों की समय की बचत होगी। परेशानी कम होगी।

मेगा प्रोजेक्ट का काम भी बड़ा-
- 85 पाइल कैप हो गए हैं तैयार।
- 51 पीयर हो गए हैं तैयार इसमें आगे पाइल का काम होगा।
- 676 पाइल पर खड़ा होगा कटनी ग्रेड सेपरेटर।
- 8 सौ से ज्यादा श्रमिक प्रतिदिन पसीना बहा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए।
- 101 से ज्यादा इंजीनियर और सुपरवाइजर सहित अन्य तकनीकी दल के लोग भी हैं शामिल।
- 11 पाइलिंग रीग मशीन की ली जा रही मदद।
- 04 बैचिंग प्लांट हैं, इसमें 2 इलेक्ट्रिक लोगो शेड के पास 1 अप लाइन साइड आरओएच शेड पास और 1 केएमजेड स्टेशन के समीप स्थापित।
- 24 ट्रांजिट मिक्चर और 09 क्रेन की मदद से तैयार हो रहा कटनी ग्रेड सेपरेटर।

 

raghavendra chaturvedi Bureau Incharge
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