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क्लिक करते ही सेट होगा ट्रेनों का रूट

एनकेजे यार्ड में बदली गई ५० साल पुरानी मैकेनिकल सिग्नलिंग प्रचालन प्रणाली, अब इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से चलेंगी ट्रेनें

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Indian Rail, Electronic Interlocking, Suvidha, Double Track, Katni News

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कटनी। एनकेजे यार्ड (सी-केबिन-यार्ड) में करीब ५० साल पुरानी मैकेनिकल सिग्नलिंग प्रचालन प्रणाली को बदल दिया गया है। बढ़ती ट्रेनों की गति, संरक्षा और समय सीमा को देखते हुए रेलवे अफसरों ने १७ दिनों में यार्ड पर केबिन प्रणाली को समाप्त कर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग का कार्य रविवार को पूरा कर लिया है। अब यहां ट्रेनें अपने निर्धारित समय से चल सकेंगी और गति सीमा भी बढ़ जाएगी। इसके अलावा एनकेजे-कटंगीखुर्द में रेल लाइन दोहरीकरण का कार्य भी पूरा हुआ। इस ट्रैक पर अब एक साथ दो ट्रेनें दौड़ सकेंगी। सिंगल ट्रैक होने के कारण ट्रेनों के परिचालन में विलंब होता था। इस कार्य के होने से ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी।
जानकारी के अनुसार एनकेजे यार्ड में मेकैनिकल इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग प्रचालन सिस्टम के साथ अबतक काम किया जा रहा था। इस प्रणाली में अलग-अलग केबिनों से ट्रेनों को रिसीव और डिस्पैच करने के लिए मैनुअल लीवर का प्रयोग किया जाता था। प्रत्येक ट्रेन को परिचालित करने के लिए केबिनों के बीच मैनुअल संचालन और समन्वय में लगभग 05-07 मिनट का समय लगता था। इसके अतिरिक्त ट्रेन संचालन में वैश्विक संरक्षा मानकों के स्तर के अनुरूप होने के लिए मैकेनिकल सिग्नलिंग को अपग्रेड भी करने की आवश्यकता थी। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग होने के बाद अब मैन्यूअल की जगह कंप्यूटराइज्ड तकनीक से गाडिय़ों के लिए रूट सेट किया जाएगा। पुरानी केबिन को बंद कर विजुवल डिस्पले यूनिट रूम से गाडिय़ों का संचालन किया जाएगा।

कल से पटरी पर लौटेंगी ४४ ट्रेनें
जानकारी के अनुसार रेलवे द्वारा एनकेजे यार्ड में १६ सितंबर से नाल इंटरलॉकिंग कार्य के लिए बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों को निरस्त, डायवर्ड व आंशिक रद्द किया गया था। ४ अक्टूबर से यहां यातायात बहाल होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी। इस कार्य के लिए ४४ ट्रेनों को निरस्त करते हुए 12 ट्रेनों को डायवर्ड रूट से चलाया जा रहा है।

एनकेजे यार्ड में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा एनकेजे-कटंगीखुर्द में रेल लाइन दोहरीकरण का कार्य किया गया है। यार्ड में ट्रेनों की लेटलतीफी से राहत मिलेगी। यातायात भी बढ़ेगा।
आशीष रावलानी, एरिया मैनेजर, एनकेजे