शहर के सैकड़ों बच्चों में पल रही थी ये गंभीर बीमारी, ऐसे हुआ खुलासा

दस्तक अभियान की स्क्रीनिंग में चौकाने वाली हकीकत

By: balmeek pandey

Updated: 10 Feb 2018, 10:57 AM IST

कटनी. बीमार बच्चों की खोज करने व उन्हें इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने दस्तक अभियान चलाया था। अभियान 18 दिसंबर से शुरू होकर 28 जनवरी तक जिले के ८८९ गांव में चलाया गया। ९०४ गांवों का डिजिटलाइजेशन किया गया था। इसमें जो रिपोर्ट सामने आई है वो कम चौकाने वाली नहीं है। जिले में ७९१ बच्चे गंभीर कुपोषित मिले हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सबसे ज्यादा गंभीर बच्चे, खून की कमी व अन्य संक्रमण से ग्रस्त शहरी कटनी व कन्हवारा सेक्टर में पाए गए हैं। ५६६ बच्चे कुपोषित मिले हैं। अभियान के तहत सामने आए आंकड़े जिले के एनआरसी केंद्रों, आंगनवाडि़य़ों सहित अन्य माध्यमों से बच्चों के लिए चलाए जा रहे सुपोषण अभियान की भी पोल खोलकर रख दी है। गत वर्ष कि तुलना में इस अभियान में अधिक बच्चे सामने आए हैं। जिले की ६ ब्लॉकों में करीब 1.50 लाख बच्चे पोर्टल पर दर्ज किए गए थे। एक माह से अधिक दिनों तक चले इस अभियान में ९९ हजार ४०५ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। सर्वे के दौरान ७९१ बच्चे गंभीर कुपोषित मिले, तो वहीं ५२० बच्चे गंभीर बीमारियों से संक्रमित पाए गए। इस दौरान तत्काल उपचार के लिए ८५ बच्चे चिन्हित किए गए। चिन्हित बच्चों को उपचार के तत्काल संबंधित एनआरसी अस्पताल रेफर किया गया। यहां बच्चों का फालोअप लेकर उन्हें सुपोषित किया जा रहा है।

इन कारणों से हुआ कुपोषण
अभियान के दौरान जहां कुपोषित बच्चों की पहचान की गई। वहीं इसके कारणों की जानकारी भी ली गई। इसमें पाया गया की गर्भावस्थ के दौरान माता की पर्याप्त देखभाल नहीं हो पाती है। इसका असर बच्चों पर पड़ता है। इससे वह कुपोषण का शिकार हो जाते है। इसके अलावा बच्चों को समय पर दूध न मिलना, बीमार होने पर उचित देखभाल न करना व समय पर टीका नहीं लगवाने से भी बच्चों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

योजना को लेकर खास-खास
- ८९४९८ बच्चों को डायरिया से बचाने दिया गया ओआरएस।
- निमोनिया से पीडि़त मिले ३२ बच्चे।
- अन्य गंभीर बीमारियों से पीडि़त मिले ५४८ बच्चे।
- १०५ बच्चे मिले जन्मजात विकृत।
- ७५ गंभीर और ९० एनिमिया के बच्चे हुए रेफर।
- ११ लाख ३ हजार १०३ बच्चों की हुई है स्क्रीनिंग।
- सालभर में ७७४ बच्चों की हो चुकी है मौत।

दल ने किया यह काम
दस्तक दल में शामिल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा एवं एएनएम ने कुपोषित बच्चों की पहचान, एनीमिया से पीडि़त बच्चों की खोज, बच्चों को विटामिन ए की खुराक, बच्चों में बाल्यकालीन निमोनिया की पहचान, दस्त से पीडि़त बच्चों की खोज, टीकाकरण से छूटे बच्चों की जानकारी, आहार संबंधित जानकारी परिजनों को देना, कम वजन के नवजात शिशुओं की देखभाल संबंधी जानकारी देना, बीमार से पीडि़त बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाने का काम किया।

ब्लॉक संख्या कुपोषित गंभीर एनीमिया संक्रमित
कटनी २२२६४ ५६६ १७ ३६ ४६४
ढीमरखेड़ा १३०७७ ३९ ०४ २३ ०९
बड़वारा १६६५८ ६४ २८ २७ २८
बहोरीबंद १७२०२ ५६ १२ ६८ ०९
रीठी ११९२६ ०७ १५ ०४ ०५
विगढ़ १८२७३ ५९ ०९ ०९ ०५
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योग- ९९४०४ ७९१ ८५ १६७ ५२०
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इनका कहना है
दस्तक अभियान में स्क्रीनिंग के बाद ७९१ बच्चे कुपोषित मिले हैं। इसमें से ८५ की हालत बेहद नाजुक होने सहित अन्य बीमारी से गंभीर को एनआरसी में भर्ती कराया गया है।
डॉ. अशोक अवधिया, सीएमएचओ।

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