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नए शिक्षण सत्र में इनकी हो जाती थी चांदी, अब भूखों मरने की नौबत…

शहर में वॉल पेटिंग करने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट, स्कूलों, कॉलेजों से हर साल गर्मी में होती थी हजारों की कमाई
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कटनी

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Mukesh Tiwari

•

Updated: 25 Apr 2020, 11:45 PM IST

Painters have no work

पेंटर।

कटनी. नवीन शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले शहर से लेकर गांव अधिकांश निजी स्कूलों व कॉलेजों द्वारा प्रचार-प्रसार के साथ छात्रों को एडमीशन लेने के लिए आकर्षित करने का दौर शुरू हो जाता था। जिसमें वॉल पेटिंग का काम अहम भूमिका निभाता था। शिक्षण सत्र से ठीक पहले लॉक डाउन शुरू हो जाने के कारण स्कूलों, कॉलेजों में जहां पढ़ाई बंद है तो वहीं एडमीशन का काम भी शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में निजी स्कूल, कॉलेजों का प्रचार वाल पेटिंग के जरिए करने वाले शहर के पेंटर्स खाली हाथ बैठे हैं। दो माह में पेंटर्स को हजारों रुपये की कमाई प्रचार-प्रसार के काम से होती थी लेकिन स्थिति यह है कि वे मुश्किल से अपने घरों का ही खर्च चला पा रहे हैं।
30 हजार से एक लाख तक का काम
शहर में दो दर्जन युवक वॉल पेटिंग का काम करते हैं। जिनको फरवरी माह से लेकर दो माह तक निजी स्कूल, कॉलेज शहर, तहसील मुख्यालयों व आसपास के जिलों के गांवों में वॉल पेटिंग का ठेका देते थे। छोटे से लेकर बड़े स्कूलों व कॉलेजों से सीजन में 30 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक काम पेंटर्स को मिलता था लेकिन इस साल जहां उनकी कमाई मारी गई तो लॉक डाउन में युवकों का घर चलाना कठिन हो रहा है।

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शादियों में भी मिलता था काम
जिन घरों में शादी समारोह होता था, वहां पर भी दरवाजे व दीवार में लोग वर वधु का नाम लिखाने के साथ ही पेंटिंग का काम भी कराते थे। गर्मी के दिनों में पेंटर्स की आय का एक जरिया वह भी होता था लेकिन लॉक डाउन में शादी समारोह आदि पर लगी रोक से यह आय भी मारी गई।

खास-खास
- सीजन में आधा सैकड़ा निजी स्कूलों, कॉलेजों की पेंटिंग का मिलता था काम
- जिला मुख्यालय से लेकर तहसील, बड़े कस्बों में जाकर करनी होती थी पेंटिंग
- कुछ स्कूल, कॉलेज एक लाख रुपये तक का देते थे काम
- सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का भी बंद पड़ा है काम
इनका कहना है...
गर्मी के दिनों में शहर के छोटे-बड़े निजी स्कूल व कॉलेजों से वॉल पेंटिंग का अच्छा खासा काम मिलता था। लॉक डाउन में सीजन की मुख्य कमाई ही नहीं मिल पाई है। एडमीशन चालू होने पर भी काम मिलने की उम्मीद नहीं है।
विकास सिंह, पेंटर

सीजन की यही कमाई है, जिससे अपने परिवार के लिए सालभर की सामग्री का इंतजाम पेंटर करते थे। फ्लैक्स ने पहले ही काम की कमर तोड़ रखी है। अब लॉक डाउन में जो काम मिलता था, वह भी नहीं मिल रहा है।
प्रदीप कुमार, पेंटर