सीएम योगी को चुनौती दे रहे खनन माफिया, धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन

 सीएम योगी को चुनौती दे रहे खनन माफिया, धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन
Illegal mining

रात भर गरजती है पोकलेन मशीनें, कभी भी हो सकती है बड़ी घटना

कौशांबी. प्रदेश सरकार के लाख दावों व जिला प्रशासन के चौकसी के बाद कौशांबी जिले के सभी आठ यमुना घाटों पर मोरंग बालू का अवैध खनन बदस्तूर जारी है। जिला प्रशासन डाल-डाल चल रहा है तो बालू माफिया पात-पात चलते हुये सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पट्टा धारक पट्टा वाली जमीन से हटकर मानक से बालू की अधिक खुदाई तो करते ही है, ओवरलोडिंग भी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।


शिकायत यह भी है कि कई बालू घाटों पर नियमों की अनदेखी करते हुये रात के समय मजदूरों की जगह पोकलैंड व जेसीबी मशीन से खुदाई कराई जा रही है शिकायत पर जिला प्रशासन के अधिकारी घाटों पर पहुंचते तो है लेकिन उनके पहुँचने तक मशीने घाट से दूर कर दी जाती है। बालू घाटों पर काम कर रहे मजदूरों के साथ भी पट्टाधारक मनमानी कर रहे हैं।


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मजदूरों का आरोप है कि पट्टाधारक उनसे पहले अपनी गाड़ियों में कम मजदूरी देकर बालू भरवाते हैं, जबकि प्राइवेट वाहनों मे बालू भरने पर अधिक मजदूरी मिलती है। मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय से गुस्से की चिंगारी सुलग रही है, जो कभी भी भयानक आग का गोला बन सकती है। वही इस पूरे मामले मे जिलाधिकारी का कहना है कि जिले के जिस भी बालू घाट से शिकायत मिलती है वहाँ औचक छापेमारी की कार्रवाई की जाती है।

कौशांबी जिले के कटैया बालू घाट पर दिखावे के लिए दिन के समय मजदूरों से बालू की खुदाई व ट्रकों/ट्रैक्टरों में लदान कराई जाती है। रात गहराते ही यमुना की तराई में पोकलैंड व जेसीबी मशीन बालू खनन में जुट जाती है। पूरी रात मशीनों से बालू खनन व लदान किया जाता है। शिकायत यह भी है कि जिस जमीन का पट्टा किया गया है उससे हटकर बालू खनन कराया जा रहा है। सबसे अहम बात तो यह कि कटैया घाट पर एक मीटर गहराई तक बालू खनन का आदेश है जबकि नियमों की अनदेखी कर पट्टाधारक लगभग तीन-तीन मीटर बालू खुदाई करवा रहे हैं। ओवरलोडिंग तो सभी घाटों पर जमकर हो रही है। यह हाल सिर्फ कटैया नहीं बल्कि जिले के उन सभी आठ बालू घाटों का है जिसका खनन पट्टा किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि बालू खनन से जुड़े पट्टाधारकों को सत्ता दल के नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है इसीलिए सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है।







वहीं मजदूरो का आरोप है कि पट्टाधारक उनसे जबरदस्ती कम दाम में पहले अपनी गाड़ियों मे लदान करवाते हैं, आठ से दस ट्रकों मे बालू लड़ने के बाद ही उन्हे प्राइवेट गाड़ियों मे लदान के लिए छोड़ा जाता है, तब तक मजदूर इतना थक जाता है कि वह काम करने मे खुद को असहाय महसूस करता है। मजदूरों की नामे तो पट्टाधारक उन्हें अपनी गाड़ी मे बालू लदवाने के एवज मे नौ सौ रुपये देते है जबकि प्राइवेट वाहनों मे बालू लादने मे उन्हे प्रति गाड़ी पंद्रह सौ रुपये मिलते है। मजदूरों के साथ पट्टाधारकों की मनमानी चिंगारी का रूप ले रही है, यदि जिला प्रशासन ने मजदूरों की समस्या का समाधान नहीं कराया तो यमुना की तराई कभी भी खूनी जंग का मैदान बन सकता है। बालू मजदूरों ने अपने हक के लिए पहले भी कई बार पट्टाधारकों से सीधी टक्कर लिया है, बालू खाना में लगे मजदूर अपने हक की लड़ाई मे कभी भी पीछे नहीं रहे है, यमुना किनारे हुई गोलीबारी मे कई मजदूरों की जान भी जा चुकी है।

डीएम का दावा है कि जिले के अधिकारी समय समय पर औचक निरीक्षण भी करते हैं, मशीन से खुदाई की शिकायत मिली है लेकिन अभी तक जांच मे कहीं भी मशीन नहीं पाई गई। मजदूरों के साथ हो रहे पट्टाधारकों की मनमानी की शिकायत पर जिलाधिकारी का कहना है कि जांच करवा कर कार्रवाई की जाएगी।
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