इस किसान ने कमजोरी को ही बनाई अपनी ताकत, और बन गया लखपति अब दे रहा दूसरों को रोजगार

हौसले व लगन देखकर लोग प्रेरणा ले रहे हैं। वहीं गांव के दर्जन भर से अधिक लोगों को काम भी दे रहा है।

By: Deepak Sahu

Published: 20 Jul 2018, 01:48 PM IST

कवर्धा . छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक व्यक्ति जन्म से दोनों पैर से नि:शक्तहै। चलने में असहाय, हाथ व पैर के सहारे बमुश्किल से कुछ कदम की दुरी तय कर पाता है, लेकिन हौसले व ईरादें इतने मजबूत है कि दूसरों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। नि:शक्त होने के बावजूद 25 एकड़ जमीन पर वैज्ञानिक पद्धति से पपीते सहित अन्य फलों की उन्नत खेती कर रहे हैं। यह अविश्वनीय नजारा देखना है तो ग्राम ठाठापुर चले आईए।

 

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ग्राम खैरझिटी निवासी 35 वर्षिय राजू पटेल जन्म से दोनों पैर से नि:शक्त है, जो पढ़ाई में स्नातक भी कर चुके हैं। पत्रिका संवाददाता पप्पू साहू उनसे मिलने उनके फार्म हाऊस ग्राम ठाठापुर पहुंचे। चर्चा दौरान राजू पटेल ने बताया कि पहले पढ़ाई पूरी करने के बाद रायपुर में थाली रेस्टारेंट चलाने के बाद क्षेत्रिय आलू चीप्स की एजेंसी व मोबाईल रिपेरिंग की काम भी किया, लेकिन काम रास न आई। फिर उसने उन्नत खेती करने की मन बनाई। इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री के गृह ग्राम ठाठापुर में लगभग 25 एकड़ के अधिया भूमि में चौबिस एकड़ पर पपीते की खेती कर रहे हैं। बाकी एक एकड़ की भूमि पर धान की फसल लहलहा रहा है। वैज्ञानिक पद्धती से 24 एकड़ के प्लाट में पतीते की फसल पर ड्रिप इरीगेशन व टपक प्रणाली के जरिए पानी का समुचित उपयोग कर उत्पादन कर रहे हैं।

खुद चलाने ट्रेक्टर में कारिगिरी
राजू दोनों पैर से नि:शक्त है। इसके चलते उन्हे ट्रेक्टर चलाने के लिए मुश्किल हो रहा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तरकीब निकालकर अपने सुविधा के लिए स्वयं कलाकारी कर ब्रेक व क्लच बनाकर हाथ में कमान संभाल कर खेत की जुताई, रोटर व प्लाऊ सहित सभी कार्य करते हैं, जिसे देखने दुर से लोग आते हैं। वह पत्रिका के माध्यम से सभी नि:शक्त भाईयों को एक सकारात्मक संदेश देना चाहते हैं।

 

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औरों को दे रहा काम
नि:शक्त होने के बावजूद उनके हौसले व लगन देखकर लोग प्रेरणा ले रहे हैं। वहीं गांव के दर्जन भर से अधिक लोगों को काम भी दे रहा है। वे खुद तो पपीते की खेती कर आर्थिक रुप से सुदृण हो रहे हैं। वहीं खेतों की निदाई सहित अन्य काम करने के लिए गांव के ही महिलाओं को काम दे रहे हैं।

फसल चक्र का लाभ
इससे पहले पिछले साल ग्राम डोंगरिया में इसी वैज्ञानिक पद्धती को अपनाकर करीब पांच एकड़ सिंचित भूमि पर पपीते की खेती की। जिसमें फलों की पूरी उत्पादन लागत दो लाख 70 हजार रुपए आई। वहीं कुल उत्पादन साढ़े सात लाख रुपए की हुई थी। अब इसी भूमि पर फसल चक्र का लाभ लेने के लिए अलग अलग फसल का उत्पादन कर लाभ अर्जित कर रहे हैं। वहीं लाईट बंद होने की स्थिति से निपटने के लिए सौलर पैनल का संयंत्र भी लगे है, जिससे पानी की समुचित व्यवस्था हो पाती है। वर्तमान में पपीते की फसल पर दवाई व खरपतवार का छिड़काव कर रहे हैं। इससे फसल को सुरक्षा मिलती है। वहीं नि:शक्त किसान पुरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है।

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