शहर से निकाल कर जंगलों में छोड़ रहे मवेशियों को, नहीं पालना चाह रहे लोग गाय

शहर से निकाल कर जंगलों में छोड़ रहे मवेशियों को, नहीं पालना चाह रहे लोग गाय

Deepak Sahu | Publish: Sep, 08 2018 04:54:45 PM (IST) Kawardha, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में चार गौशालाएं है, जहां एक हजार से अधिक मवेशी (गौवंश) मौजूद हैं।

कवर्धा . छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में चार गौशालाएं है, जहां एक हजार से अधिक मवेशी (गौवंश) मौजूद हैं।वहीं हर नगरीय निकाय और गांवों के बाहर सड़कों पर मवेशी ठोकर खाते हुए दिखाई देंगे। यह हालात इसलिए क्योंकि लोग अब गौवंश पालना नहीं चाहते।सड़कों पर हादसों में गौवंश की मौत हो रही है, क्योंकि लोग घर के मवेशियों को सड़कों पर छोड़ दिए हैं। उनके लिए चारा, पानी की व्यवस्था नहीं कर रहे। ऐसे में मवेशी शहर में भटकते रहते हैं।

पिछले दिनों नगर पालिका और पुलिस प्रशासन मवेशी पकड़ों अभियान चलाया गया, क्योंकि यह यातायात को प्रभावित कर रहे थे। करीब 130 से अधिक मवेशी पकड़े गए। लेकिन इन मवेशियों को नगर पालिका के कर्मचारियों ने भोरमदेव मंदिर के आसपास ही छोड़ दिया गया। उन मवेशियों की जिम्मेदारी अब न तो पालिका की, न ही प्रशासन की और न ही मवेशी मालिक की।

दान कर रहे मवेशी
वहीं गांवों में भी अब ग्रामीण गौवंश को पालने से कतरा रहे हैं।इसके चलते ही तो ग्रामीण अपने मवेशी वनांचलवासियों को दान कर रहे हैं या फिर यूं ही छोड़ रहे हैं। लेकिन सभी वनांचल के लोग इन मवेशियों को नहीं रखते। कुछ तो इन्हें मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में बेच देते हैं। अधिकतर मवेशी कत्लखाने भेज दिए जाते हैं।

आखिर क्यों कतरा रहे
गांवों में अब चारा की कमी हो चुकी है। चारागाहों पर ग्रामीणों का ही कब्जा हो चुका है, जबकि हर गांव में चारागाह के लिए जगह आरक्षित रहता है।घरों में भी गौवंश के लिए जगह ही नहीं रखा जाता।किसान व ग्रामीण अपनी जरूरत के हिसाब से दो-चार गौवंश ही रखते हैं। इसके चलते ही घरों में गौवंश की संख्या घटकर सड़क पर बढ़ गई है।

145 लाख अनुदान
जिले के चार में से तीन गौशाला को हर साल अनुदान राशि दी जाती है, ताकि मवेशियों की सुरक्षा व उचित देखरेख किया जाए। वर्ष 2014 -15 से 2017- 18 तक शासन की ओर से तीनों गौशाला को कुल 145.49 लाख रुपए अनुदान दिए गए।बावजूद एक ही गौशाला में मवेशी की बेहतर देखरेख होती है। बाकी दो गौशाला में स्थिति बदहाल है।

गौशालाओं में क्षमता से अधिक मवेशी
जिले में चारों गौशाला में क्षमता से अधिक मवेशी मौजूद हैं। गौशालाओं में कुल 999 मवेशी रखने की क्षमता है, लेकिन 1200 से अधिक मवेशी रखे गए हैं। इसके बाद ग्रामीण और विभिन्न समाजिक संस्था द्वारा यहां पर मवेशियों को रखने दबाव बनाया जाता है। क्षमता से अधिक मवेशी रखेंगे तो परेशानी होगी, जिससे चारा पानी देने में दिक्कतें होती है। हालात और भी खराब हो जाएंगे।

पालिका ने खींचा हाथ
अभियान में पकड़े गए मवेशियों को कांजीहौस में रखने से पालिका प्रशासन ने हाथ खींच लिए और प्रशासन से गुहार लगाई कि इन्हें गौशाला में रखा जाए। गौशाला की क्षमता जाने बिना ही प्रशासन ने भी हामी भर दी। मवेशियों को लेकर नगर पालिका के कर्मचारी जब छपरी स्थित गौशाला पहुंचे तो क्षमता से अधिक मवेशी होने के चलते समिति ने मना कर दिया। बावजूद मवेशियों को वही पर रखने का दबाव बनाया गया। इस पर प्रशासन ने जांच कराई तो पता चला कि गौशाला की क्षमता 173 की है जबकि मौजूद मवेशियों की संख्या 234 है।

कबीरधाम के पशु चिकित्सा विभाग उपसंचालक एनपी मिश्रा ने बताया कि अभी गौशालाओं में क्षमता से अधिक मवेशी मौजूद हैं। गौशाला का कुछ दिन पहले ही निरीक्षण किया गया। वहां पानी और चारे की पर्याप्त व्यवस्था है। अभी किसी तरह की समस्या नहीं है।

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