माओवादियों से निपटने के लिए गांवों में पहले से पैठ बना चुकी पुलिस

माओवादियों से निपटने के लिए गांवों में पहले से पैठ बना चुकी पुलिस

Deepak Sahu | Publish: Sep, 03 2018 07:05:00 PM (IST) Kawardha, Chhattisgarh, India

वर्षों से माओवादियों की चहल कदमी है, लेकिन किसी प्रकार की वारदातें नहीं होती थी।

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में वर्षों से माओवादियों की चहल कदमी है, लेकिन किसी प्रकार की वारदातें नहीं होती थी। लेकिन अब एक के बाद एक वारदाते सामने आ रही है। इससे लोगों में डर है, लेकिन माओवादियों के पूरी तरह पैठ जमाने के पहले से ही पुलिस अपनी पैठ बना चुकी है।जिले के गांवों में माओवादियों को छुपने के लिए ठिकाना नहीं मिल रहा है और वे जंगल में ही रात गुजार रहे हैं। इसका खुलासा शुक्रवार की रात को पुलिस के जवान व माओवादियों के बीच हुए मुठभेड़ से हुआ है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार रात में माआवेादी जंगल में अपना राशन लेकर रुके हुए थे।अचानक जवानों के पहुंचने पर फायरिंग हुई।इसके बाद जवानों ने फयरिंग किया जिसमें एक महिला माओवादी की मौत हुई।माओवादियों को किसी भी जिले में ठिकाना नहीं मिल रहा, जिसके चलते वह भटक रहे हैं।कबीरधाम में भी पुलिस वनांचल के सभी गांव में आस्था अभियान, कई प्रकार की खेल प्रतियोगिता व अन्य पुलिसिंग से गांव में अपनी पैठ जमा चुके हैं।इसके कारण माओवदियों को गांव में शरण नहीं मिल पा रहा है।

15 सौ युवाओं को ट्रेनिंग

पुलिस प्रशासन द्वारा वंनाचल के 15 सौ से अधिक युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे गांव में पुलिस प्रशासन के पक्ष में अच्छी छवि बनी है। वहीं अब तक 100 से अधिक युवाओं की नौकरी भी लग चुकी है।वर्तमान में 70 युवक-युवतियों का सस्त्रबल में चयन हुआ। इससे पहले कुछ युवाओं को पैरामिल्ट्री, एयर फोर्स सहित पुलिस बल में नौकरी लगी है।गांव गांव के युवा पुलिस से ट्रेनिंग ले रहे हैं।

तीन कैम्प, दो थाने खोले गए
माओवादियों के मंसुबों को पुलिस भांप चुकी थी, जिसके चलते ही पुलिस व 17 वीं बटालियन द्वारा वनांचल में कैंप तैयार कर लिया गया। वनांचल ग्राम कुंडपानी, झलमला, कोयलार झोरी में एक साल पहले ही जवानों का कैंप तैयार हो गया। वहीं माओवादियों के आवागमन रूट पर झलमला और सिंघनपुरी में थाना ही खोल दिया गया। इससे माओवादियों को अपनी दिशा ही बदलनी पड़ी।

बंदूक का डर
माओवादियों की संख्या जिले में बढ़ चुकी है। लेकिन ग्रामीण उनका साथ नहीं दे रहे हैं। उनके बंदूक के डर से जरूर उन्हें राशन पानी दे रहे हैं, लेकिन सहयोग के रूप में नहीं।

कबीरधाम पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह ने कहा कि हमने काफी पहले से ही गांव-गांव में अपनी पैठ जमा ली है। जिले में तीन कैंप खुल चुके हैं। साथ ही वनांचल के 15 सौ युवाओं को सेना व पुलिस में जाने ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। इसमें 100 से अधिक की नौकरी लग चुकी है।

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