इस स्कूल में ग्रामीण भी शिक्षक बनकर संवारते हैं बच्चों का भविष्य

इस स्कूल में ग्रामीण भी शिक्षक बनकर संवारते हैं बच्चों का भविष्य

Yashwant Kumar Jhariya | Publish: Sep, 05 2018 11:06:58 AM (IST) Kawardha, Chhattisgarh, India

यहां ग्रामीण भी शिक्षकों की तरह भूमिका निभाते हैं। इसके चलते ही जिले का उत्कृष्ट स्कूल है।

कवर्धा . ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे भी स्कूल और शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं जो केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को ही देखते हैं। इसमें ग्रामीण भी शिक्षकों की तरह भूमिका निभाते हैं। इसके चलते ही जिले का उत्कृष्ट स्कूल है।
बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सिवनीखुर्द में उत्कृष्ठ प्राथमिक शाला है। यहां की खास बात यही है कि इस स्कूल और विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल शिक्षक-शिक्षिकाओं पर नहीं, बल्कि ग्रामीणों पर भी है। यहां पर शिक्षक-शिक्षिकाएं अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाते हैं। स्कूल में कभी शिक्षक नहीं आता तो शाला प्रबंध समिति को सूचित करता है। समिति के माध्यम से उक्त शिक्षक की पूर्ति किसी ग्रामीण से की जाती है। कोई पालक या ग्रामीण एक दिन का शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाई कार्य कराता है। वहीं रोजाना कोई न कोई ग्रामीण स्कूल का निरीक्षण भी करते हैं ताकि स्कूल में व्यवस्था बनी रहे।

राशि एकत्रित कर बनाए कक्ष
सिवनीखुर्द में १९६४ से स्कूल खुला। वहीं १९९६ में स्कूल भवन का निर्माण हुआ। नए भवन के लिए निर्माण राशि तो २०१० में स्वीकृत हुई, लेकिन राशि वर्ष २०१७-१८ में पहुंची। तब तक भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका था। शासन से स्वीकृत राशि चार लाख ४८ हजार रुपए से भवन तैयार हो सकते थे। इसके लिए शाला प्रबंधन समिति और ग्रामीणों राशि एकत्रित की। इसके बाद दो कमरा, एक प्रधानपाठक कक्ष और एक हाल का निर्माण किया।
शिक्षा निधि कोष से बच्चों पर खर्च कर रहे
स्कूल के प्रयास को देखते हुए पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा यहां शिक्षा निधि कोष बनाया गया। इसमें डीईओ, बीईओ, एबीईओ ने सहयोग राशि दी। कोष में स्वेच्छा से ग्रामीण और शिक्षक-शिक्षिकाएं राशि एकत्रित करते हैं, जिसका उपयोग बच्चों के हित में किया जाता है। इस तरह पालक बच्चों का भविष्य संवारे का प्रयास कर रहे हैं। शासन से सहयोग मिलने का इंतजार भी नहीं करते हैं।

टेबल-कुर्सी और फिल्टर भी
स्कूल में बच्चों के लिए टेबल-कुर्सी उपलब्ध है। यह भी शिक्षा विभाग और ग्रामीणों की मदद से खरीदा गया। वहीं शुद्ध पेयजल के लिए फिल्टर की व्यवस्था की गई है। हर माह शाला प्रबंध समिति की बैठक होती है, इसमें स्कूल की गतिविधियों पर सुविधाओं को लेकर चर्चा की जाती है। कहीं कुछ कमी है तो ग्रामीण मिलकर उसकी पूर्ति करते हैं। ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ अन्य सुविधा भी मिल सके। इसके लिए पालक आगे आकर सहयोग कर रहे हैं।
पौधों की जिम्मेदारी
स्कूल में अन्य गतिविधियों के माध्यम से भी जोर दिया गया। स्कूल की साज-सज्जा, बागवानी पर विशेष ध्यान दिया गया। वहीं स्कूल बड़ी संख्या में पौधे रोपे गए। पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को भी दी गई। वहीं विद्यार्थियों को वृक्ष मित्र कार्ड जारी किया।
डीईओ सीएस ध्रुव ने बताया कि जिले में सिवनीखुर्द का प्राथमिक स्कूल उत्कृष्ठ शाला में से एक है। यहां शिक्षक और शाला प्रबंध समिति मिलकर कार्य करते हैं। बच्चों के गणवेश और बैठक व्ययस्था निजी स्कूल से बेहतर है।

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