छत्तीसगढ़ में बिछ गई बर्फ की सफेद चादर, भारी बारिश के साथ गिरे ओले, तेजी से गिरने लगा पारा

प्रदेश भर में बेमौसम बारिश व कड़ाके की ठंड से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 03 Jan 2020, 02:43 PM IST

कवर्धा . प्रदेश भर में बेमौसम बारिश व कड़ाके की ठंड से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। पिछले तीन दिन से बदली के साथ हल्की बूंदा-बांदी हो रही है, लेकिन गुरुवार को तो गरज चमक के साथ घंटों तेज बारिश के साथ दिनभर बूंदाबादी होती रही। वनांचल में तो बारिश के साथ ओले भी गिरे। इससे तापमान में लगातार गिरावट भी आई है। लोग ठंड़ से बचने के लिए अंगीठी-अलाव का सहारा ले रहे हैं।

वनांचल ग्राम चिल्फी की घाटियां सहित पूरा जिला इन दिनों शीतलहर की चपेट में है। बारिश के साथ ठंडी हवाएं चलने से लोगों की कंपकपी छूटने लगी है। समूचा इलाका ठंड के कारण प्रभावित हो गया है। चिल्फी घाटी में पिछले एक सप्ताह से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पारा गिरकर तीन से चार डिग्री रह गया है। पारा गिरने से घाटी में शीतलहर चलने लगी है। शीतलहर ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है। दिनभर लोग गर्म कपड़ों के साथ देखे जा रहे हैं। लोगों का घरों से निकलना कम हो गया है।

ठंडी हवाएं चलने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। बुजुर्ग लोग जहां दिनभरों घरों में ही दुबके रहते हैं। वहीं छोटे-छोटे बच्चे स्कूल से लौटने के बाद ठंड के कारण घर से बाहर नहीं निकलते। कामकाजी लोगों की भी दिनचर्या में काफी बदलाव आ गया है। रात में ग्रामीण अंगीठी जलाकर ठंड भगाने की जुगत में रहते हैं। इस कड़ाके की ठंड ने लोगों को सोंचने पर मजबूर कर दिया है।

लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा असर
ठंड अधिक बढऩे के कारण लोगों की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। खासतौर से बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर देखने को मिल रहा है। प्राय: प्रत्येक घर में कोई न कोई सर्दी जुकाम से पीडि़त है। सर्दी से बचने के लिए लोग घरों में अंगीठी जला रहे हैं। जंगल क्षेत्र के गांवों में अलाव जलाकर अपने शरीर को गर्माते देखा जा सकता है। मौसम में अचानक हुए इस बदलाव से सर्द हवाएं चलने लगीं है।

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