नोटबंदी से एक साल में ये हुआ नफा-नुकसान, जानिए क्यों नहीं उभरा 45 फीसदी बाजार

मध्यप्रदेश के खंडवा में नोटबंदी का एक साल व्यापारियों और आमजन के लिए नफा-नुकसान वाला रहा। पांच सेक्टर में क्या उतार-चढ़ाव आए पढि़ए।

By: संजय दुबे

Published: 08 Nov 2017, 12:24 PM IST

खंडवा. 8 नवंबर को नोटबंदी का पूरा एक साल हो गया। ये पूरा साल बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा। इसमें कुछ सेक्टर तो चौपट होने की कगार पर हैं तो कुछ मंदी की गर्त से निकल नहीं पा रहे हैं। अकेला ऑटोमोबाइल सेक्टर ही २० फीसदी का उछला है। पत्रिका ने मार्केट और आमजन को प्रभावित करने वाले सेक्टरों की पड़ताल की तो कुछ दर्द तो कुछ नए अनुभव सामने आए। नोटबंदी के एक साल को स्कैन करने की कोशिश की है। व्यापारियों को लांग टर्म तो आमजन को शॉर्ट टर्म नुकसान हुआ है।

पत्रिका ने जाने पांच सेक्टर के हाल
सराफा:- ६० प्रतिशत गिरा, २४ करोड़ का नुकसान
जिले में २५० सराफा दुकानें हैं। शहर में १२५ के करीब और ग्रामीण क्षेत्र में १४० के आसपास। नोटबंदी के बाद से इस बाजार में ६० प्रतिशत गिरावट है जो अभी तक नहीं उभरा। सूत्रों के मुताबिक सालाना सराफा में ४० करोड़ की खरीदी-बिक्री होती है। जो इस साल मात्र १६ करोड़ के आसपास रही है। यानी सीधे २४ करोड़ का नुकसान हुआ है। सराफा से जुड़े १५० बंगाली कारीगर भी बेरोजगार होकर घर लौट गए थे। स्थिति अभी यहां सुधरी नहीं है।
प्रॉपर्टी:- ९० फीसदी ठप, इन्वेस्टर गए
जिले में प्रॉपर्टी मार्केट १०० करोड़ के पार का है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र में ३५ से अधिक कॉलोनियां निर्माणधीन हैं। नोटबंदी के बाद से इक्का-दुक्का खरीदी-बिक्री हुई है। यानी ८० करोड़ से अधिक का नुकसान है। शहर में १५ बिल्डर तो ग्रामीण क्षेत्र में २० डेवलपर-कॉलोनाइजर हैं। इन्वेस्टर बाजार से गायब हैं। तैयार कॉलोनी में दो साल पुराने रेट पर भी प्लॉट-मकान व दुकान नहीं बिक रहे। इससे रजिस्ट्री में २५ फीसदी की गिरावट आई है।
इलेक्ट्रॉनिक:- त्योहारों में भी सन्नाटा रहा, दो तरफा मार पड़ी
जिले में इलेक्ट्रॉनिक बाजार में सालाना ३५ करोड़ का बाजार उठता है। इसमें शादी, त्योहार मिलाकर। शहर में २५ छोटी-बड़ी तो ग्रामीण क्षेत्र में ३५ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक शोरूम हैं। विलासिता की वस्तु होने के कारण बाजार नोटबंदी के बाद फीका रहा। ग्राहक दुकान में चढ़े ही नहीं। सूत्रों की मानंे तो २० करोड़ का नुकसान हुआ है। यानी १५ करोड़ की खरीदी-बिक्री में पूरा साल निकल गया। फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक में स्थिति सामान्य हो रही है।
रेडिमेड कपड़ा:- जिलेभर में ६० करोड़ से अधिक का बाजार, ४० में ही सिमटा
जिले में रेडिमेड कपड़ा बाजार ६० करोड़ सालाना उठता है। शहर में १५० से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में २०० से अधिक दुकानें हैं। हालांकि नोटबंदी का बाजार ४० प्रतिशत गिरावट के साथ ४० करोड़ में ही सिमट गया है। कपड़ा व्यापारी मानते हैं कि यह जरूरत की वस्तु नहीं होने से इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। फिर भी ६० करोड़ का सालाना करोबार ४० करोड़ पर ही सिमट कर रह गया है। हालांकि कुछ ही महीनों में स्थिरता आ गई थी।
ऑटोमोबाइल:- मंदी के बाद भी २० फीसदी बाजार उछला, ग्राहकों ने दिखाई रुचि
जिले में ७ कंपनियों की बाइकें बाजार में हैं। ये सेक्टर सालाना ७० करोड़ के आसपास है। हर साल यहां सभी कंपनियों की करीब १२ हजार बाइक बिकती हैं। लेकिन इस साल ये आंकड़ा बढ़कर १४ हजार के पार हो गया। क्योंकि बीएस-३ मॉडल बंद होने के बाद इनके दामों में भारी गिरावट आई है। इस कारण लोगों ने ६० से ७० फीसदी कीमतों में बाइकों को खरीदा। मोटे तौर पर सीधे दस करोड़ रुपए की ज्यादा खरीदी-बिक्री हुई है।

नोटबंदी से ये तीन फायदे...
ब्याज दर कम हुई... पिछले साल के मुकाबले इस साल हाउसिंग दरों में 3 फ ीसदी तक कमी आई है। पिछले साल ये दरें जहां 10.5 से लेकर 12 फ ीसदी तक थीं, अब ये 8 से 9 फ ीसदी तक आ गई हैं।
महंगाई कम हुई... अवैध पैसे को खपाने फि जूलखर्ची होती थी। संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर नजर रखी गई। इसकी वजह से इन ट्रांजेक्शन में काफ ी कमी आई। इसका फ ायदा महंगाई दर घटने के रूप में मिला।
कैशलेस ट्रांजेक्शन... कैशलेश ट्रांजेक्शन बढऩे में काफ ी मदद मिली। कैश की किल्लत होने से न सिर्फ लोगों ने ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन किए, बल्कि कैशलेस का आंकड़ा तेजी से बढ़ा। हालांकि अभी भी स्थिति बेहतर नहीं है।
नोटबंदी से ये तीन नुकसान...
लेनदेन में दिक्कत... भले ही १२ महीने से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन आज भी बैंकों के कई एटीएम से सिर्फ 2000 और 500 रुपए के ही नोट निकल रहे हैं। इससे व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं।
बचत खाते पर ब्याज दर घटी.. एसबीआई समेत कई सरकारी और निजी बैंकों ने सेविंग अकाउंट पर ब्याज दर घटा दी है। बैंकों में लिक्विटी बढ़ी थी, ऐसे में बैंकों ने ब्याज दर घटा दी।
छोटे उद्योगों को नुकसान... ज्यादा प्रभाव उन उद्योगों पर पड़ा है जो ज्यादातर कैश में लेनदेन करते थे। नोटबंदी के दौरान इन उद्योगों के लिए कैश की किल्लत हो गई, कारोबार पूरी तरह ठप हो गया। हालांकि बड़ों पर असर नहीं हुआ।

बोले व्यापारी...
& सराफा में ६० फीसदी गिरावट है। सरकार ने नियमों में एेसा उलझाया कि धंधा ही मंदा हो गया। किसानों के पास पैसा नहीं होने से इन्वेस्ट ही नहीं हुआ। - संतोष सराफा, सचिव, सराफा एसो.
& नोटबंदी के बाद तीन महीने ग्राहक बाजार ही नहीं आया। इसके बाद कुछ स्थिति सामान्य हुई। इलेक्ट्रॉनिक बाजार को भारी नुकसान हुआ है। कुछ राहत मिली। - ऋषि होरा, व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक
& प्रॉपर्टी मार्केट मंदी के दौर में है। दो साल पुराने रेट में भी जमीन-प्लॉट नहीं बिक रहे हैं। नोट बंदी, रेरा, इन्वेस्टर से स्थिति खराब हुई है। नए साल से उम्मीदें हैं। - आनंद नागौरी, बिल्डर
& ऑटोमोबाइल में १२ हजार बाइक बिकती हैं लेकिन इस साल १४ हजार से अधिक बिकी हैं। बीएस-३ से बूम आया, जिसमें सस्ते दामों में ज्यादा बाइक बिकी। २० फीसदी उछला रहा। - पलास सेठी, डीलर ऑटोमोबाइल

संजय दुबे Desk/Reporting
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