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मां को इलाज नहीं मिला तो खुद तैयार की औषधि, बचाई जिंदगी

मध्यप्रदेश के खंडवा में एक शिक्षक ने 15 साल की मेहनत बाद चर्मरोग को दूर करने के लिए औषधि तैयार की है। मां के उपचार में इसका उपयोग किया।

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If the mother did not get treatment then herself prepared medicine

If the mother did not get treatment then herself prepared medicine

पुष्पेंद्र साहू खंडवा. मां को डायबिटीज से होने वाले स्किन इफेक्ट और आंखों पर असर पडऩे पर जब हजारों रुपए खर्च करके भी कोई हल नहीं निकला तो एक संगीत शिक्षक ने खुद ही इसके इलाज के लिए ठानी। संगीत की साधना के बीच शिक्षक ने 15 साल तक शोध कर एक ऐसा पाउडर बनाया जो चर्म रोग के लिए रामबाण साबित हो रहा है। सबसे बड़ी बात इसे अपने ही घर के आंगन में लगी जड़ी-बूटियों से तैयार किया है। इसका नाम 'कायाकल्पÓ रखा है जो सभी प्रकार के चर्म रोगों में फायदेमंद है।
मां की प्रेरणा से बनाई घरेलू दवाई
पेशे से संगीत शिक्षक रविचंद्र जोशी ने 15 साल तक विभिन्न प्रयोग कर कायाकल्प नाम से एक पाउडर बनाया है। शिक्षक जोशी ने बताया मां को डायबिटीज के चलते स्किन इफेक्ट होने लगा। हर जगह इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मां को समस्या बढ़ती ही जा रही थी। ऐसे में स्वयं ही अपने आसपास मौजूद जड़ी-बूटियों से इलाज करने की ठानी। कई तरह की जड़ी-बूटियों को मिलाकर पहले स्वयं पर प्रयोग किया और सफल होने पर उसे मां पर भी प्रयोग किया। इस प्रयोग में 15 साल लग गए तब जाकर कायाकल्प पाउडर बन सका। सबसे पहले इस पाउडर को मां की बीमारी में लगाया जो दूर हो गई। बाद में इसे अन्य लोगों को भी उपयोग के लिए दिया, जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।
ऐसे तैयार किया पाउडर
पाउडर तैयार करने में तुलसी, पुदीना, नीम, बेल, पिपरमेंट, गुड़हल के फूल सहित अन्य जड़ी-बूटियों का मिश्रण तैयार कर कायाकल्प पाउडर बनाया है। इसे दूध के साथ घोलकर चेहरे या अन्य शरीर पर लगाना होता है।
साबुन का हो सकता है अच्छा विकल्प
शिक्षक जोशी ने बताया कि इस शोध को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो यह पाउडर साबुन का अच्छा विकल्प हो सकता है। क्योंकि इसे लगाने के बाद साबुन लगाने की जरूरत नहीं होती है। इसके नियमित प्रयोग से कुछ ही दिन में फोड़े-फुंसी, मुंहासे सहित अन्य चर्मरोग दूर हो जाते हैं।
प्रकृति से लगाव, करते रहते हैं प्रयोग
बागवानी का शौक और प्रकृति से लगाव के चलते शिक्षक जोशी हमेशा नया प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने घर पर ही कई तरह की जड़ी-बूटियों के पौधे लगा रखे हैं। इनकी देखभाल वह बच्चों की तरह करते हैं। जोशी का मानना है कि यदि आप पौधों से प्यार करेंगे तो वह आपसे भी प्यार करेंगे।
आंगन को बनाया बगीचा, दो हजार पौधे लगाए
जोशी ने अपने घर के आंगन में छोटी से नर्सरी तैयार कर ली है। इसमें करीब दो हजार से अधिक विभिन्न तरह के पौधे लगा हैं। इन पौधों में पांच तरह की तुलसी, उत्तराखंड का पुदीना, 20 प्रकार का गुलाब, लेमन के पौधे, हल्दी, अदरक, संतरा, अनार, छुईमुई से लेकर बोनसाई पेड़ शामिल हैं। इनमें एक बोनसाई बरगद का पेड़ है जो 35 साल पुराना है। इनके पौधों के फूल को वह पाउडर बनाने में उपयोग करते हैं। इसके अलावा वह लोगों को नि:शुल्क तुलसी के पौधों का भी वितरण करते हैं। ताकि लोगों में तुलसी लगाने के प्रति जागरुकता बढ़े।

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