कारगिल के पास शहीद हो गया था जवान, परिवार को अब तक नहीं मिली जमीन

कारगिल के पास शहीद हो गया था जवान, परिवार को अब तक नहीं मिली जमीन

Amit Kakra | Updated: 13 Aug 2019, 02:38:12 PM (IST) Kishangarh, Ajmer, Rajasthan, India

2013 में हुआ था शहीद, छ:ह साल बाद भी जमीन के इंतजार में शहीद परिवार
कृषि कनेक्शन के भी लगाने पड़ रहे हैं सरकारी महकमों में चक्कर
बालापुरा के शहीद प्रभुलाल चौधरी के परिवार को नहीं मिली सरकार की ओर से जमीन

अमित काकड़ा
मदनगंज-किशनगढ़.
एक तरफ देश में 73 वें स्वाधीनता दिवस का जश्न मनाने की तैयारियां की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ देश के लिए अपनी जान देने वाले शहीदों के परिवारों को छोटे छोटे कार्यों के लिए भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे है। किशनगढ़ के बालापुरा गांव के शहीद परिवार को छ:ह साल बाद भी सरकारी जमीन जमीन मिलना तो दूर की बात, कृषि कनेक्शन के लिए भी करीब डेढ़ महीनें से विद्युत वितरण निगम के चक्कर काटने पड़ रहे है, लेकिन इसकी न तो सैनिक कल्याण बोर्ड को कोई परवाह है और न ही जिला प्रशासन को चिंता।
बालापुरा के रहने वाले प्रभुलाल चौधरी 571 आर्मी सप्लाई कोर में कारगिल में तैनात रहे थे। 19 अक्टूबर 2013 को ड्यूटी के दौरान कारगिल में तैनात जवानों को रसद सामग्री पहुंचाने वाले प्रभुलाल चौधरी के कापिले के वाहन पर बीच रास्ते में अचानक पहाड़ी से टूट कर चट्टान का एक बड़ा हिस्सा गिर गया और इसमें जवान प्रभुलाल चौधरी की मौके पर शहीद हो गए और पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ चले गए। जवान के शहीद होने के बाद परिवार को सरकार की ओर से दी जाने वाली 25 बीघा जमीन अब तक नहीं मिली। यहीं नहीं कृषि कनेक्शन के लिए भी डेढ़ माह से परिवार विद्युत वितरण निगम के चक्कर लगा रहा है। इस अनदेखी से शहीद का परिवार बुरी तरह व्यथित है। शहीद के लिए स्मारक भी परिवार ने स्वयं के खर्च से बनवाया। इसके लिए भी परिवार को कोई मदद नहीं मिली।
विरांगना प्रेमदेवी ने बताया कि सरकार की ओर से 25 बीघा जमीन दी जानी थी। लेकिन अब तक नहीं मिली है। बीते कई वर्षों से कार्रवाई चल रही है। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। शहीद के पुत्र मुकेश चौधरी ने बताया कि बीते दिनों कृषि कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। लेकिन करीब डेढ महीने से कनेक्शन नहीं मिला है। कई बार कहने के बाद भी इंतजार कराया जा रहा है।
खेती कार्य से होता है परिवार का भरण पोषण
शहीद के परिवार में उसकी पत्नी प्रेम देवी, बेटा मुकेश और मोहित है। मुकेश कला प्रथम वर्ष और मोहित नवीं कक्षा में अध्यनरत है। शहीद की वृद्ध मां कालीदेवी, ताऊ सूजा चौधरी, ताई किशनी देवी यह सभी संयुक्त परिवार में जीवन यापन करते है। शहीद की पत्नी प्रेमदेवी खुद खेती कार्य करती है। परिवार के सदस्य खेती और पशुपालन का कार्य करते है।
दुर्गम स्थल पर थे तैनात
विरांगना प्रेमदेवी ने बताया कि उनके पति प्रभुलाल चौधरी बतौर चालक फौज में सेवारत थे। वह ड्यूटी के दौरान जम्मु कश्मीर में दो बार तैनात रहे। एक बार करीब तीन साल के लिए और दूसरी बार कारगिल में तैनात हुए। करीब डेढ साल हुआ था। लेकिन एक दिन कारगिल के पास कापिला के वाहन पर चट्टान गिर गई और वह देश के लिए प्राण त्याग दिए।
इनका कहना है
मामले में कार्रवाई जारी है। फाइल भिजवा दी गई है।
अशोक तिवाड़ी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी

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