माओवादियों ने मंत्री शुभेन्दु का सिर काटने की दी धमकी

- पश्चिम मिदनापुर शहर से सटे मूड़ाकाटा इलाके में चिपकाए पोस्टर

By: Ashutosh Kumar Singh

Published: 15 Nov 2018, 10:52 PM IST

कोलकाता

जंगलमहल के नाम से मशहूर पश्चिम बंगाल के माओवाद प्रभावित पश्चिम मिदनापुर जिले में माओवादी गतिविधियां दिन-ब-दिन तेज होने लगी हैं। ग्वालतोड़ इलाके से 4 माओवादियों की गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद गुरुवार को मूड़ाकाटा इलाके में उनके समर्थन में कई पोस्टर चिपकाए पाए गए। माओवादियों ने पोस्टर में परिवहन मंत्री शुभेन्दु अधिकारी का सिर कलम करने की धमकी दी है। सादे कागज पर लाल रंग की स्याही से लिखे पोस्टर में स्पष्ट शब्दों ने लिखा था ‘‘हम दगाबाज-खूनी शुभेन्दु का सिर चाहते हैं।’’ सुबह स्थानीय लोगों से सबसे पहले पोस्टरों को देखा, फिर पुलिस को खबर दी। खबर पाते ही पुलिस पहुंची। पुलिस ने सारे पोस्टरों को जब्त कर लिया। शुभेन्दु अधिकारी जंगलमहल के दबंग और लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। उनकी हत्या की धमकी भरे पोस्टर पाए जाने से लोगों में दहशत फैल गई है।

जिला पुलिस अधीक्षक आलोक राजोरिया ने कहा कि पोस्टरों की जांच की जा रही है। ये पोस्टर मूड़ाकाटा इलाके में किसने चिपकाए हैं, पोस्टर भाकपा (माओवादी) संगठन के हैं या किसी और ने दहशत फैलाने के लिए संगठन के नाम का इस्तेमाल किया है? इन तमाम बातों की जांच की जा रही है।

इससे पहले ग्वालतोड़ इलाके से पुलिस ने सव्यसाची गोस्वामी (52), संजीव मजूमदार उर्फ असीम, अर्कश्री गोस्वामी उर्फ विजय (23) एवं टीपू सुल्तान उर्फ सपन (23) नामक चार माओवादियों को गिरफ्तार किया था। उत्तर २४ परगना जिले के सोदपुर के एच.बी. टाउन इलाका निवासी सव्यसाची, आगरपाड़ा के कुसुमपल्ली के आर.के.देवपथ रोड निवासी संजीव, दक्षिण कोलकाता के पर्णश्री इलाका निवासी अर्कद्वीप तथा बीरभूम जिले के शांति निकेतन थाना क्षेत्र के पश्चिम पल्ली इलाका निवासी टीपू सुल्तान सभी इलाके में बैठक करने वाले थे। पुलिस को भनक लग गई थी। पुलिस ने उन्हें दबोच लिया था।

वर्ष 2011 में जिले के बूढ़ीसोल जंगल में केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में कुख्यात माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के ठेर होने के बाद से पश्चिम मिदनापुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया और बांकुड़ा जिले में माओवादियों का संगठन प्राय: ध्वस्त हो गया था। कई माओवादी मुठभेड़ में मारे गए थे। कुछ राज्य छोड़ कर भाग गए थे। बड़ी संख्या में माओवादियों ने समपर्ण कर दिया था। तब से जंगलमहल शांत था। माओवादी गतिविधियां प्राय: न के बराबर दिख रही थीं, लेकिन इधर कुछ दिनों से माओवादी फिर से सक्रिय हो गए हैं।

Ashutosh Kumar Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned