बंगाल में हिंसा के खिलाफ 23 से सड़क पर उतरेगी भाजपा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं पर हो हमले के खिलाफ प्रदेश भाजपा ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है। चुनाव बाद मंगलवार को पहली कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेश भाजपा ने 23 जून से हिंसा के खिलाफ धरना देने का फैसला किया है।

By: Rabindra Rai

Updated: 09 Jun 2021, 12:27 AM IST

बैठक से नदारद रहे मुकुल रॉय और राजीव बनर्जी
कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं पर हो हमले के खिलाफ प्रदेश भाजपा ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है। चुनाव बाद मंगलवार को पहली कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेश भाजपा ने 23 जून से हिंसा के खिलाफ धरना देने का फैसला किया है। पार्टी ने अपने सांसदों और विधायकों की ओर से बंगाल में हिंसा के संबंध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन देने का फैसला किया है।
बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि बंगाल में विपक्ष के खात्मे की कोशिश की जा रही है। चुनाव के बाद हिंसा के कारण 25 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता प्रदेश से बाहर हैं। पार्टी राज्य में हुई हिंसा की 10 हजार घटनाओं का ब्यौरा एसटी, अल्पसंख्यक, मानवाधिकार आयोग को भेज रही है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार वहां भी भेजी जा रही है। 23 जून से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। राज्य में लगातार हिंसा की घटनाएं घट रही हैं। वैक्सीन को लेकर राज्य में राजनीति की जा रही है। उन्होंने पार्टी विधायकों के भाजपा में जाने की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। हालांकि बैठक में सांसद सौमित्र खां, सव्यसाची दत्ता और दुलाल बर उपस्थित थे।
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बैठक की मुझे जानकारी नहीं: मुकुल
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने कहा कि उन्हें बैठक की जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि दिलीप घोष ने कहा कि सभी को बैठक के बारे में सूचना दी गई थी। लोगों ने कहा था कि वे बैठक में आएंगे, लेकिन संभवत: अस्वस्थता के कारण वे नहीं आ पाए। उल्लेखनीय है कि हाल में ही मुकुल रॉय के पुत्र शुभ्रांशु रॉय ने भाजपा की ओर से ममता बनर्जी की आलोचना करने के लिए पार्टी की निंदा की थी।
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अनुशासन कमेटी बनाई
विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बेलगाम होते देख प्रदेश भाजपा ने मंगलवार को ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने के लिए अनुशासन कमेटी का गठन किया। कोलकाता के हेस्टिंग स्थित पार्टी कार्यालय में बैठक के दौरान उक्त कमेटी का गठन किया गया। पार्टी सांसद सुभाष सरकार को इस तीन सदस्यीय कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है और बाकी दो सदस्य विश्वप्रिय रॉय चौधरी व रथीन बोस हैं। कमेटी पार्टी के भीतर नाराजगी और विरोध को सुलझाने का काम करेगी।
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राष्ट्रपति शासन की धमकी पसंद नहीं करेंगे लोग: राजीव
इस बीच तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेता राजीव बनर्जी के स्वर बदलते दिख रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कहा कि लोग भारी जनादेश से चुनी गई गई सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति शासन की धमकी को पसंद नहीं करेंगे। पूर्व मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी एवं यास तूफान से उत्पन्न संकट की घड़ी में सभी को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए और राज्य के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया कि अगर जनता के भारी समर्थन से चुनी गई सरकार का महज विरोध करने के लिए दिल्ली और अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) की धमकियों का इस्तेमाल किया जाता है, तो लोग इसे पसंद नहीं करेंगे।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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