कांग्रेस से दोस्ती के मुद्दे पर असमंजस में माकपा

कांग्रेस से दोस्ती के मुद्दे पर असमंजस में माकपा

Prabhat Kumar Gupta | Publish: Oct, 13 2018 10:20:57 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 10:20:58 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस के साथ चुनावी दोस्ती के मुद्दे पर माकपा में असमंजस है।

 

- पश्चिम बंगाल में तृणमूल और भाजपा को शिकस्त देना प्राथमिकता
- कोलकाता में बोले माकपा महासचिव सीताराम येचुरी

कोलकाता.

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस के साथ चुनावी दोस्ती के मुद्दे पर माकपा में असमंजस है। आगामी लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ कांग्रेस समेत समान विचारधारा वाले दलों के साथ तालमेल के सवाल पर राजी होने के बावजूद पश्चिम बंगाल के संदर्भ में वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। पार्टी राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक में हिस्सा लेने शनिवार को कोलकाता पहुंचे महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि वे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं।
राज्य मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि केंद्र में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने की दिशा में पार्टी हर संभव त्याग करने को तैयार है। पश्चिम बंगाल के संदर्भ में येचुरी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को शिकस्त देना माकपा समेत वाम दलों की प्राथमिकता है। माकपा केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के लिए अलग-अलग चुनावी रणनीति बना रही है। भाजपा नीत एनडीए में शामिल दलों को हराना समय की मांग है। पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि, रोजमर्रा के काम में आने वाले सामानों की महंगाई, किसानों की दुर्दशा और बेरोजगारी को लेकर देश की जनता त्रस्त है। लोकसभा चुनाव में माकपा इन मुद्दों को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दलों को चुनौती देगी। प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व बदले जाने के बाद की परिस्थिति को लेकर येचुरी ने कहा कि माकपा राज्य में कांग्रेस से दोस्ती करेगी या नहीं यह आने वालों में समय में स्पष्ट हो जाएगा।

किसान विरोधी केंद्र सरकार-
माकपा महासचिव येचुरी ने केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि देश में किसानों की हालत एकदम दयनीय है। नरेन्द्र मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव में किसानों के हर समस्याओं का समाधान चुटकी में कर देने तथा भरोसा दिया था। सस्ते दर में खाद और बीज उपलब्ध कराने तथा किसानों का कर्ज माफ करने जैसे वादे किए गए थे। पर मोदी सरकार अपने करीब 4.5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद भी किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार मोदी सरकार की विशेष उपलब्धियों में शामिल है। विजय माल्या, नीरब मोदी और मेहुल चोकसी प्रकरण इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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