bengal cinema - सर्विस चार्ज बढऩे की मांग इम्पा ने की अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा

bengal cinema - सर्विस चार्ज बढऩे की मांग इम्पा ने की अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा

Renu Singh | Updated: 11 Jul 2019, 03:00:40 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

-बंद होने की कगार पर है सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर

कोलकाता

सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में सर्विस चार्ज बढ़ाने की मांग पर ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (इम्पा) ने अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल की घोषणा की है। मंगलवार को इम्पा के चेयरमैन पिया सेनगुप्ता ने कहा कि लगातार बंद होने की कगार पर जा रहे सिंगल सिनेमाघरों को बचाने के लिए इम्पा की ओर से यह निर्णय लिया गया है। संवादादाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में एक-एक कर सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बंद होते हो जा रहे हैं।
बेहला के एलोरा और सोदपुर के मिनी रथीन्द्र सिनेमा को हाल ही में बंद कर दिया गया है। अर्थिक संकट से जूझ रहे इन सिनेमाघरों को बचाने वाला कोई नहीं है। इम्पा की ओर से मांग की गई है कि इस वर्ष से फिल्म टिकट के लिए राज्य सरकार सेवा शुल्क निर्धारित करे। राज्य के सिंगल स्क्रीन लंबे समय से मालिकों को 2 से 3 रुपए सर्विस चार्ज मिलता है। अब उसे 5-10 रुपए तक बढ़ाने की मांग की गई। आर्थिक संकट के बाद भी सरकार से उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। दूसरी ओर इम्पा का दावा है कि वे पिछले एक साल से सिंगल स्क्रीन का सर्विस चार्ज बढ़ाने की बात कर रहे हैं, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

900 में से मात्र बजे हैं 200 सिनेमाघर

पश्चिम बंगाल में वर्तमान समय में 900 में से केवल 200 सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बचे हुए हैं। लोगों क ी जीवनशैैली व बढ़ती सुविधाएं लोगों को मल्टीप्लेक्स के पास ले जाती है। स्थिति यही रही, तो शायद सारे सिंगल स्क्रीन बंद हो जाएंगे। मालूम हो कि नब्बे के दशक में फिल्म टिकट के लिए सेवा शुल्क शुरू किया गया था। हालांकि मोदी सरकार के दौरान जीएसटी के बाद से अन्य सभी करों को वापस ले लिया गया है। अन्य राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, गोवा, त्रिपुरा और झारखंड सहित कई अधिक राज्यों में सिनेमाघर के रखरखाव के लिए विशेष नियम हैं। सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार सिनेमाघरों को अर्थिक सहायता देने को मौखिक रूप से सहमत थी, लेकि न इस पर कोई भी लिखित आश्वासन नहीं दिया था। इसके कारण सिंगल स्क्रीनघरों के सिनेमा मालिकों को भंयकर घाटे से गुजरना पड़ रहा है।

 

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