World terrorism and development: क्या विश्व के विकास के लिए संभव है आतंकवाद को मिटाना

भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने अपने कोलकाता दौरे के दौरान दुनियां के सतत विकास 2030 के महत्वकांक्षी एजेंडों को लागू करने के लिए विश्व में शान्ति को जरूरी बताया। आतंकवाद पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने विश्व समुदाय से आतंकवाद को मदद करने वाली शक्तियों से लडऩे के लिए संकल्प लेने का अह्वान किया। क्या विश्व समुदाय आतंकवाद के मददगारों से लडऩे के लिए एकजुट हो पाएगा।

युवाओं से क्यों उपराष्ट्रपति ने किया समाजिक ताना-बाना मजबूत करने का अह्वान
कोलकाता
भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को अपने कोलकाता दौरे के दौरान भारत को शान्ति का दूत बताते हुए दुनियां के सतत विकास 2030 के महत्वकांक्षी एजेंडों को लागू करने के लिए विश्व में शान्ति कायम करने पर जोर दिया। आतंकवाद पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने विश्व समुदाय से आतंकवाद को मदद करने वाली शक्तियों से लडऩे के लिए संकल्प लेने का अह्वान किया। क्या विश्व समुदाय आतंकवाद के मददगारों से लडऩे के लिए एकजुट हो पाएगा।
देश के युवाओं से सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने और अपनी मातृभाषा को जिंदा रखने का अह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति नायडू ने रविवार को कहा कि भारत विविधता में एकता, बहुलतावादी लोकाचार और सभी धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए जाना जाता है। इस लोकाचार का पोषण किया जाना चाहिए और लोगों में ***** भेद या अंतर नहीं करने चाहिए। देश के युवाओं सामाजिक सौहार्द बनाने पर ध्यान केंद्रित करने और सामुदायिक बंधन को मजबूत करने की दिशा में काम करें।
वे यहां रोटरी इंटरनेशनल के वैश्विक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर राज्यपाल जगदीप धनखड़, राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ब्रत्य बसु और रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। उन्होंने देश के युवाओं से अपनी मातृभाषाओं को नहीं भूलाने का भी अह्वान किया और अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बंगाली और हिंदी में कुछ पंक्तियां भी कही।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है और शांति और प्रगति के माहौल की वकालत करता है। विश्व समुदाय को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली किसी भी शक्ति के खिलाफ लडऩे का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अपने सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहता है। हमें एक स्टैंड लेना चाहिए, जिसके तहत हम सभी को ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां शांति फैल सके। किसी भी देश का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि हम सभी अपने दोस्तों को बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसियों को नहीं बदल सकते।
उन्होंने कहा कि शांति प्रगति के लिए जरूरी है। भारत हमेशा 'वसुधैव कुटुम्बकम' यानि दुनिया एक परिवार है की अवधारणा में विश्वास करता है। भारत ने "एक साथ रहने" और "एक साथ काम करने" में विश्वास किया है। पूरी दुनिया सतत विकास २०३० के महत्वाकांक्षी एजेंडा लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में शायद दूनिया को इस दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत है।

क्या विश्व के विकास के लिए संभव है आतंकवाद को मिटाना

रचनात्मक चर्चा और बहस करें सांसद
इस मौके पर लंबे समय तक संसद में भाजपा के प्रतिनिधित्व करने वाले उपराष्ट्रपति नायडू ने देश के सांसदों से रचनात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश के सांसद संसद में उपराष्ट्रपति ने सांसदों से रचनात्मक तरीके से चर्चा और बहस करनी चाहिए। चर्चा और बहस किसी समस्या के समाधान के लिए नतीजे पर पहुंचने के लिए किया जाना चाहिए, न कि किसी को परेशान करने के लिए किया जाना चाहिए। असहमत पर सहमत हो। देश के सांसदों से उनका आग्रह है कि वे सरकार को प्रस्ताव देने दें, विपक्ष को विरोध करने दें और संसद को समस्यायों को निपटाने दें।

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Manoj Singh Reporting
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