निर्जला एकादशी पर बांटे आम और शर्बत

निर्जला एकादशी पर बांटे आम और शर्बत

Shishir Sharan Rahi | Updated: 14 Jun 2019, 04:56:25 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

लिलुआ में दान-पुण्य

कोलकाता. निर्जला एकादशी पर गुरुवार को वार्ड 42 की पार्षद सुनीता झंवर ने बड़ाबाजार थाना, एमजी रोड चौराहे पर स्थानीय नागरिकों में आम और शीतल शर्बत का वितरण किया। इस दौरान उनके साथ किशन झंवर, मनोज सोनकर, पप्पू चांडक, रंजीत लूनिया, राजकुमार बाहेती, पूनम मूंधड़ा, विमल राठी, गौरीशंकर भूतड़ा, आशीष जैन, भगीरथ सारस्वत, मनीष सरावगी, कुशल पांडे, कमलजीत पांडे, अनुज कोचर, नरेन्द्र कोचर आदि मौजूद थे। लिलुआ. निर्जला एकादशी के अवसर पर जगह-जगह दान-पुण्य कार्य किए गए। सुबह से विभिन्न इलाकों में कहीं शरबततो कहीं दही लस्सी पिलाई गई। क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मटकी पंखी दान की।
----------ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार यह 13 जून को मनाया गया।
सनातन धर्म में श्रीहरि को सर्वाधिक प्रिय एकादशी व्रत है।
निर्जला एकादशी में जल पीना मना है। केवल कुल्ला या आचमन करने के लिए मुख में जल डाल सकते हैं। इसके अलावा जल पीने से व्रत टूट जाता है। सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन के सूर्योदय तक जल का त्याग करना चाहिए।
एक बार महर्षि व्यास से भीम ने कहा-भगवन! युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, माता कुन्ती और द्रौपदी, सभी एकादशी व्रत करते हैं। मुझसे भी व्रत रखने को कहते हैं, पर मैं तो बिना खाए रह नहीं सकता। मुझे तो कोई ऐसा व्रत बताइए, जिसे मैं कर सकूं और जिससे स्वर्ग की प्राप्ति भी हो। तब व्यासजी ने कहा- ‘कुंतीनंदन, धर्म की यही विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता, बल्कि सबके योग्य साधन व्रत-नियमों की लचीली व्यवस्था भी करता है। ज्येष्ठ मास में सूर्य के वृष या मिथुन राशि में रहने पर शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को तुम व्रत करो। श्री कृष्ण ने मुझे इस बारे में बताया था। इसे करने से तुम्हें वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होगा और सुख, यश प्राप्त करने के बाद स्वर्ग भी मिलेगा। भीम ने बड़े साहस के साथ निर्जला एकादशी का व्रत किया, लेकिन इस कठिन व्रत के कारण सुबह होने तक वह बेहोश हो गए। तब गंगाजल, तुलसी चरणामृत, प्रसाद देकर अन्य पांडव उन्हें होश में लाए। भीम ने द्वादशी को स्नान आदि कर भगवान केशव की पूजा कर व्रत सम्पन्न किया। इसी कारण इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। निर्जल रह कर ब्राह्मण या जरूरतमंद आदमी को हर हाल में शुद्ध पानी से भरा घड़ा इस मंत्र के साथ दान करना चाहिए।

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