कोलकाता में अब मलेरिया ने पसारे पैर, व्यवसाई की मौत

- महानगर कोलकाता व उसके आस-पास के जिलों में डेंगू का आतंक अभी थमा भी नहीं था कि अब मलेरिया ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। वृहत्तर बड़ाबाजार में मच्छरजनित इस रोग की चपेट में आने से एक व्यवसायी की मौत हो गई। मृतक का नाम दिनेश साव(46) है।

By: Jyoti Dubey

Published: 08 Dec 2019, 03:28 PM IST

कोलकाता. महानगर कोलकाता व उसके आस-पास के जिलों में डेंगू का आतंक अभी थमा भी नहीं था कि अब मलेरिया ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। वृहत्तर बड़ाबाजार में मच्छरजनित इस रोग की चपेट में आने से एक व्यवसायी की मौत हो गई। मृतक का नाम दिनेश साव(46) है। वार्ड नं. 42 अंतर्गत 12 नंबर रूपचांद राय स्ट्रीट निवासी दिनेश कई दिनों से बीमार था। रक्त परीक्षण की रिपोर्ट में मलेरिया पाया गया था।

कुछ दिनों तक मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी में भर्ती रहने के बाद 27 नवंबर को हालत बिगड़ जाने पर परिजनों ने उसे साल्टलेक स्थित एक निजी अस्पताल में स्थानातंरित कराया था। उसे आईसीयू में रखा गया था। जहां गुरुवार की रात तबीयत ज्यादा बिगडऩे के बाद उसकी मौत हो गई। अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत के कारणों में सेपसिस, मल्टी-ऑर्गेन फेलियर के साथ ही मलेरिया का उल्लेख किया गया है।

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- जोड़ों के दर्द से शुरू हुआ बुखार :

मृतक के परिजनों ने बताया कि बुखार आने से पूर्व दिनेश को पिछले कई दिनों से जोड़ों में दर्द हो रहा था। उसके बाद अचानक कभी तेज और कभी हल्का बुखार आने लगा। रक्त की जांच में मलेरिया निकला।

मेयर फिरहाद हकीम ने इस बारे में विस्तारित जानकारी न मिलने की बात बताई। साथ ही लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरुक रहने की सलाह दी।
इस वर्ष कोलकाता सहित पूरे पश्चिम बंगाल में डेंगू और स्क्रब टायफस ने दहशत मचा रखी है। एक ओर जहां राज्यभर में 50 से अधिक जने डेंगू की बलि चढ़ चुके हैं। अब महानगर में मलेरिया से मौत ने लोगों को और आतंकित कर दिया है। निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस साल कोलकता में मलेरिया से मौत का यह पहला मामला है।

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- पार्षद ने कहा बाहर से लाया था बुखार :

वार्ड नम्बर 42 की पार्षद सुनीता झंवर ने कहा कि दिनेश काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था। वहीं उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। वह वहां से बुखार की हालत में वापस लौटा और यहां उसकी हालत और बिगड़ गई। साथ ही वह लंबे समय से किडनी और लीवर की समस्या से भी ग्रसित था। 

उनके अनुसार पूरे वार्ड में नियमित साफ-सफाई होती है। सप्ताह में दो दिन ब्लीचिंग पाउडर और कीटनाशक का छिडक़ाव होता है। व्यवसायिक इलाका होने की वजह से यहां रोजाना हजारों की संख्या में बाहरी लोग आते हैं। ऐसे में वे अपने साथ बीमारियां भी लाते हैं। हालांकि अब तक वार्ड में किसी अन्य निवासी के ज्वर पीडि़त या बीमार होने की जानकारी नहीं मिली है।

Jyoti Dubey
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