पश्चिम बंगाल: अब ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी ममता सरकार, भत्ता देने की घोषणा की

पश्चिम बंगाल: अब ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी ममता सरकार, भत्ता देने की घोषणा की

Krishna Das Parth | Publish: May, 21 2019 09:08:19 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

पश्चिम बंगाल: अब ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी ममता सरकार, भत्ता देने की घोषणा की
-अंतिम संस्कार करानेवाले ब्राह्मणों को भत्ता देने की हुई घोषणा


कृष्णदास पार्थ
लोकसभा चुनाव-2019 का परिणाम पश्चिम बंगाल में जो भी हो, लेकिन भविष्य की रणनीति तय करते हुए पश्चिम बंगाल की सरकार ब्राह्मणों को लुभाने में जुट गई है। तृणमूल नेतृत्व वाले कोलकाता नगर निगम ने इसे साकार करने के उद्देश्य से ही मंगलवार को महानगर के सभी सात श्मशानों के ब्राह्मणों को जून माह से भत्ता देने की घोषणा की। स्वभाविक है कि इससे श्मशानों में अंतिम संस्कार करानेवाले ब्राह्मण लाभांवित तो होंगे ही साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार के कृतज्ञ भी होंगे। जिसका लाभ तृणमूल को आगामी चुनाव में मिल सकता है।
आमतौर पर दाह संस्कार करानेवााले ब्राह्मणों का घर-परिवार मृत व्यक्तियों की ओर से दिए गए दक्षिणा से ही चलता है। लेकिन दक्षिणा कम मिलने से उनका परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए ही नगर निगम ने इसे अपने मासिम अधिवेशन में मंगलवार को पारित किया। अब इसे विधानसभा के स्थायी समिति में वित्तीय अनुमति के लिए भेज दिया जाएगा।
महानगर कोलकाता में कुल सात श्मशान हैं। इन श्मशानों पर कम से कम 49 ब्राह्मण हैं जो अंंतिम संस्कार कराते हैं। इनको ही कोलकाता नगर निगम की ओर से ये भत्ते दिए जाएंगे। इन श्मशान घाटों के नाम केवड़ला, सिरी, निमतला, काशी मित्र घाट, गरिया, काशीपुर और गार्डेनरीचा है। मालूम हो कि ये ब्राह्मण घरों या मंदिरों में पूजा नहीं करा सकते हैं। इसलिए इनको दाह-संस्कार से मिलने वाले दान से ही अपना घर चलाना पड़ता है। यह बताया जाता है कि जो घरों या मंदिरों में पूजा-पाठ कराते हैं उनकी तुलना में इनकी आय काफी कम है। इस संबंध में कोलकाता के मेयर फीरहाद हकीम का कहना है कि श्मशान के ब्राह्मणों को प्रत्येक अंतिम संस्कार के लिए 380 रुपए दिए जाएंगे। उनका यह भत्ता जून माह से शुरू हो जाएगा। हकीम का कहना है कि यह प्रस्ताव पहले ही पारित हो गया था, लेनिक चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण इसकी घोषणा नहीं की गई थी। भाजपा का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार हिंदुत्व पर जोर दे रही है जिस कारण यह भत्ता देने के लिए मजबूर हुई है।

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