script कोयला खदान के लिए भिलाई खुर्द समेत इन इलाकों को कराया जाएगा खाली, चलेगा प्रबंधन का बुलडोजर | Bulldozer will run in these areas including Bhilai Khurd for coal mine | Patrika News

कोयला खदान के लिए भिलाई खुर्द समेत इन इलाकों को कराया जाएगा खाली, चलेगा प्रबंधन का बुलडोजर

locationकोरबाPublished: Dec 26, 2023 05:45:33 pm

Bulldozer action in cg: किसी भी हाल में अपनी खाली नहीं करेंगे। बताया जाता है कि वर्ष 1960 में कोयला कंपनी ने मानिकपुर खदान के लिए ग्राम दादरखुर्द, भिलाई खुर्द, ढेलवाडीह, रापाखर्रा, कर्रानार और बरबसपुर की जमीन का अधिग्रहण किया था

koyla_khadan.jpg
CG Bulldozer action: एसईसीएल प्रबंधन मानिकपुर कोयला खदान के विस्तार की योजना बना रहा है। इसके लिए प्रबंधन की जमीन की जरुरत है। भिलाई बस्ती को हटाकर प्रबंधन जमीन की कमी को पूरा करना चाहता है।
इसका गांव के लोग विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी हाल में अपनी खाली नहीं करेंगे। बताया जाता है कि वर्ष 1960 में कोयला कंपनी ने मानिकपुर खदान के लिए ग्राम दादरखुर्द, भिलाई खुर्द, ढेलवाडीह, रापाखर्रा, कर्रानार और बरबसपुर की जमीन का अधिग्रहण किया था। उस समय अपनी जरुरत के अनुसार कंपनी ने जमीन को खाली कराया। वहां से कोयला खनन शुरू किया।

अधिग्रहण के 62 साल बाद कंपनी को ग्राम भिलाई खुर्द की याद आई है। कंपनी भिलाई खुर्द की बस्ती को हटाकर यहां से कोयला खनन करना चाहती है। 1960 में अधिग्रहित जमीन की नाप जोख करने के लिए भिलाई खुर्द पहुंचे एसईसीएल के स्थानीय अधिकारियों का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रबंधन ने 1960 में जमीन अधिग्रहण किया तो खाली क्यों नहीं कराया? अब बस्ती में पक्की सड़क, नाली, स्कूल और सामुदायिक भवन जैसे अन्य विकास कार्यों को सरकार की ओर से कराया गया है, तो प्रबंधन को जमीन की याद आ रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बस्ती को खाली करने से इनकार कर दिया है। ग्राम भिलाई बस्ती के जिस जमीन की जरुरत एसईसीएल प्रबंधन को है, वहां अभी लगभग 150 मकान बताए जा रहे हैं। जबकि पूर्व के रिकार्ड में मकानों की संख्या लगभग 110 थी। 62 साल में मकानों की संख्या बढ़ी है।

कब्जे की राह आसान नहीं
कंपनी जिस जमीन पर कब्जा चाहती है, उसपर भिलाई बस्ती के मकान हैं। इस जमीन का कुछ हिस्सा कंपनी ने हसदेव बायीं तट नहर और रेल लाइन के लिए दिया हुआ है। बस्ती में लगभग 150 मकान हैं। स्थानीय लोगों का विरोध इतना अधिक है कि प्रबंधन के लिए जमीन पर कब्जा कर कोयला खनन की राह आसान नहीं है। कब्जा हटाने प्रबंधन के सामने चुनौतियां पेश आएंगी।
त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने की मांग की है। ताकि 1960 में अधिग्रहण के दौरान कंपनी के वादों को 62 साल बाद जमीन पर परखा जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने 1960 में जमीन अधिग्रहण के दौरान गांव के लोगों से जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया। दस्तावेज होने के बाद भी पात्र लोगाें को नौकरी मिली। इससे लोगों में नाराजगी है।
खदान से सालाना सात मिलियन टन कोयला उत्पादन की योजना
वर्तमान में मानिकपुर खदान से सालाना 5.2 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी की योजना खदान से कोयला उत्पादन बढ़ाकर सात मिलियन टन करने की है। इसके लिए कंपनी को जमीन की जरुरत है। गौरतलब है कि मानिकपुर खदान आउटसोर्सिंग पर चल रहा है। इसमें ठेका कर्मी अधिक हैं।
स्थाई और अस्थाई रोजगार की मांग
स्थानीय लोगाें ने एसईसीएल प्रबंधन से 1960 में जमीन अधिग्रहण के समय अपनाई गई नीति के तहत स्थाई और अस्थाई रोजगार की मांग की है। इसमें 5 डिसमिल से कम या अधिक जमीन के अधिग्रहण पर स्थाई रोजगार का प्रवधान था। वहीं प्रबंधन की ओर बताया गया है कि प्रशासन और कोल इंडिया की नीति के अनुसार ग्रामीणों को रोजगार प्रदान किए जाएंगे।

ट्रेंडिंग वीडियो