कोरोना ने मेडिकल कॉलेज की उपचार संसाधनों की ताकत बढ़ाई

कोटा. कोरोना ने कोटा मेडिकल कॉलेज की उपचार संसाधनों की ताकत बढ़ा दी है। कॉलेज में माइक्राबॉयलॉजी विभाग की लैब में एक माह में नई सूक्ष्म जीवाणु प्रयोगशाला तैयार हो गई। कॉलेज को कई उपकरणों की सालों से मांग थी, जो कोरोना काल में पूरी हो गई।

 

 

By: Abhishek Gupta

Published: 23 May 2020, 04:59 PM IST

कोटा. कोरोना ने कोटा मेडिकल कॉलेज की उपचार संसाधनों की ताकत बढ़ा दी है। कॉलेज में माइक्राबॉयलॉजी विभाग की लैब में एक माह में नई सूक्ष्म जीवाणु प्रयोगशाला तैयार हो गई। कॉलेज को कई उपकरणों की सालों से मांग थी, जो कोरोना काल में पूरी हो गई। कॉलेज के पास नई मशीनों व अन्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए लगभग 16 करोड़ का बजट प्रावधान हुआ है। इसमें से कोरोना काल में 5 करोड़ का बजट आ चुका है।

10 लाख की तैयार हुई प्रयोगशाला

मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच में प्रयोग होने वाली मशीनों की स्वीकृति मिली तो पीसीआर लैब में एक पार्ट पर जगह का चयन किया गया। वहां दस लाख की लागत से नई सूक्ष्म जीवाणु प्रयोगशाला तैयार की गई। यह एक माह में तैयार हो गई। उसमें नई पीसीआर व आरएनए एक्सटेंशन मशीनों को रखा गया। कॉलेज के पास पहले चरण में 2 करोड़ 74 लाख का बजट व दूसरे चरण में भी करीब 2 करोड़ रुपए आया है।

एक से दो हजार जांचों का दायरा बढ़ेगा

शहर में जैसे ही कोरोना की आहट हुई तो उपचार में संसाधनों की मांग भी हुई। संसाधनों की खरीद के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए। प्रस्ताव सरकार को भेजे गए। प्रस्ताव
स्वीकृत होने पर कई संसाधन आने लगे। उसके बाद कोरोना काल में कॉलेज में धीरे-धीरे जांचों का दायरा बढ़ता गया। वर्तमान में प्रतिदिन 1 हजार सैम्पल लिए जा रहे। उसके बाद अब दो हजार तक सैम्पल की जांच का दायरा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। कॉलेज में दो पुरानी पीसीआर मशीनें है। नई एक कायजन, दो बायोरेट व एक आरएनए एक्सटेंशन मशीन आ चुकी है। आरएनए क्सटेंशन को इंस्ट्रॉल का कार्य चल रहा है। इससे जांचों के कार्यों में तेजी आएगी। इसके अलावा दो बायोरेट व तीन आरएनए एक्सटेंशन मशीन और आएगी।

नए वेन्टीलेटर व बाइपेप भी खरीदेंगे

कोरोना काल में सबसे बड़ी जरुरत वेन्टीलेटर की थी। वह भी पूरी होगी। कॉलेज स्तर पर 75 नए वेन्टीलेटर व 50 बाइपेप भी खरीदे जाएंगे।

इनका यह
कहनामेडिकल कॉलेज के लिए लगभग 16 करोड़ बजट का प्रावधान हुआ है। इसमें से
पांच करोड़ का बजट आ चुका है। इसमें नई मशीनें खरीदी गई और प्रयोगशाला के
सिविल कार्य किया। मशीनें आने से कोरोना की एक हजार तक जांचों का दायरा
भी बढ़ गया। अब जांचों के दायरे को दो हजार तक बढ़ाने के प्रयास किए जा
रहे है। - डॉ. विजय सरदाना, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

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