लोकसभा अध्यक्ष के पिता और सहकार नेता पंच तत्व में विलीन

कोटा के किशोरपुरा मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन की पालना की गई।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 30 Sep 2020, 11:21 AM IST

कोटा. कोटा में सहकारिता की नींव को मजबूत करने वाले और अनेक संस्थाओं को खड़ा करने में संबल देने वाले सहकार पुरुष श्रीकृष्ण बिरला अब नहीं रहे। उनके निधन के बाद हाड़ौती शोक में डूबा है। उनके निधन के बाद हर कोई उनकी सादगी और कार्यशैली की चर्चा करता नजर आया। बुधवार को किशोरपुरा मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन की पालना की गई। उनके बड़े पुत्र राजेश बिरला और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्याग्नि दी। वे कोटा कर्मचारी सहकारी समिति (सभा नम्बर 108) से 1962 से जुड़े हुए थे। ढाई दशक से इस सहकारी समिति के अध्यक्ष के रूप में कमान संभाले हुए थे। वे सहकारी संस्था को अपनी मेहनत और लगन से सींचते रहे। अंतिम समय तक इस समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करते रहे। बिरला की कुशल कार्यशैली का ही नतीजा है कि 1920 में मात्र 535 रुपए के अंशदान से शुरू की गई इस सहकारी समिति का टर्नओवर 200 करोड़ पहुंच गया है। समिति के सचिव विमल चंद जैन का कहना है कि समिति की स्थापना को अगस्त में सौ साल हो गए हैं। उनकी इच्छा थी कि 100वीं आमसभा में भव्य आयोजन किया जाए। इसके माध्यम से सहकारिता आंदोलन के सशक्तिकरण का संदेश देना था, लेकिन कोविड के कारण आम सभा का आयोजन नहीं हो पाया। बिरला की कार्यशीलता का ही परिणाम है कि प्रदेश की यह एक मात्र ऐसी सहकारी समिति है, जिसका आज तक कोई ऋण नहीं डूबा। पिछले दिनों स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उन्होंने संचालक मंडल की बैठक बुलाकर सदस्यों के ऋण स्वीकृत किए थे। वे हमेशा टीम भावना से काम करते थे। कोटा नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजेश बिरला का कहना है कि पिताजी हमेशा जरूरतमंदों की सेवा के लिए प्रेरित करते थे। समाजसेवा के लिए वे हमेशा तत्पर रहते थे, यही सीख हमें दी है। विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

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