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Video: हार-जीत से फर्क नहीं पड़ता, लुप्त कला को मंच मिला मानो राह मिल गयी अब पा लेंगे मंजिल

कोटा. जिला युवा बोर्ड की ओर से गुरुवार को नयापुरा स्थित सूचना केन्द्र में संभाग स्तरीय युवा सांस्कृतिक प्रतिभा खोज महोत्सव का आयोजन किया गया।
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कोटा

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abhishek jain

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Updated: 7 Dec 2017, 9:28 PM IST

प्रतिभा खोज महोत्सव

कोटा.

जिला युवा बोर्ड की ओर से गुरुवार को नयापुरा स्थित सूचना केन्द्र में संभाग स्तरीय युवा सांस्कृतिक प्रतिभा खोज महोत्सव का आयोजन किया गया। युवाओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर राजस्थानी कला व संस्कृति की झलक दिखाई। महोत्सव में कोटा , बूंदी, बारां व झालावाड़ में जिला स्तरीय महोत्सव में चयनित युवाओं ने भाग लिया।

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उन्होंने पधारो म्हारे देश..., रामसा पीर थारी..., समेत भजन, लोक नृत्य, एकल गायन, हारमोनियम, तबला, मृंदग, कत्थक, गिटार, बांसूरी की मनमोहक प्रस्तुतियां दी। दर्शकों ने तालियों की गडगड़़ाहट से स्वागत किया गया।

योजनाओं की लगी प्रदर्शनी

महोत्सव में युवाओं के उत्थान के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम व कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई।

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हार-जीत से फर्क नहीं पड़ता

मुख्य अतिथि जिला सत्र एवं न्यायाधीक्ष नरेन्द्र सिंह डढ्ढा ने कहा कि हार-जीत से फर्क नहीं पड़ता। मंच पर प्रस्तुति देना ही काफी है। विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि लुप्त होती कलाओं को आगे लाने का यह अच्छा मंच है। इस मंच से युवाओं को राज्य स्तर ही नहीं राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर जाने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम में कोई जिला प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। जिला युवा बोर्ड के सचिव भी नहीं आए है।

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इनमें नहीं मिला कोई प्रतिभागी

मुख्यमंत्री ने लुप्त होती कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए अपनी बजट घोषणा में जुड़वाया था, लेकिन कोटा संभाग से भारतनाट्यम, ओडिसी, मणिपुरी, कच्चीपुरी, वीणा, सारंगी अलकोजा, खरताल, फड, कामायाचा, कटपुतली से एक भी कलाकार नहीं मिला। इस कारण इनकी प्रविष्टी खाली रही। बताया जा रहा है कि प्रचार-प्रसार की कमी के कारण ग्रामीण प्रतिभाएं सामने नहीं आ पाई।


यह रहा परिणाम

महोत्सव में भजन, लोकनृत्य, एकल गायन, चित्रकला, हारमोनियम, तबला, मृदंग में बारां प्रथम, लोकगीत, कत्थक, आशुभाषण में बूंदी प्रथम, सितार में झालावाड़ प्रथम, गिटार, रावणहत्था, बांसूरी, भित्ती चित्र में कोटा प्रथम रहा।