राहुल गाँधी जिस योजना की तारीफ करते थे उसी में कांग्रेस के सरपंच ने कर दिया घोटाला...जांच में फंसें सरपंच ग्राम सेवक

राहुल गाँधी जिस योजना की तारीफ करते थे उसी में कांग्रेस के सरपंच ने कर दिया घोटाला...जांच में फंसें सरपंच ग्राम सेवक

Suraksha Rajora | Updated: 08 Aug 2019, 07:34:48 PM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

Scam बिना काम किये तालाब में उठा लिया लाखों का भुगतान...किसान मोर्चा उतरा सड़को पर

 

कोटा. लाडपुरा की गंदीफली ग्राम पंचायत के भगवानपुरा तालाब में अधूरे काम को पूरा बताकर मनरेगा भुगतान उठाने का मामला अब गर्मा रहा है। भाजपा किसान मोर्चा के पदाधिकारियों व भगवानपुरा के ग्रामीणों ने गुरुवार को जिला परिषद की एसीईओ को ज्ञापन में ग्राम पंचायत और सरपंच की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। सीईओ ने इसे गंभीर मानते हुए जांच का आश्वासन दिया है।

राजस्थान पत्रिका ने गुरुवार के अंक में भगवानपुरा तालाब में मनरेगा में बिना कार्य ही सात लाख से अधिक का भुगतान उठाने का मामला उजागर किया था। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि 2016-17 में भगवानपुरा में देवनारायण मंदिर के सामने तालाब की खुदाई व पिचिंग का कार्य पूर्णता बताया गया है, जबकि वहां पर एक पत्थर भी नहीं लगा। इसका फ र्जी तरीके से भुगतान उठा लिया गया।

मोर्चा के प्रदेश मंत्री मुकुट नागर ने बताया कि भगवानपुरा गांव में तालाब में ग्राम पंचायत का बोर्ड लगाकर दर्शाया गया था कि 2016 17 में 8 लाख 98 हजार का खुदाई व पिचिंग का कार्य 2018 में पूर्ण कर दिया गया है, जबकि वहां कोई काम हुआ ही नहीं था। मोर्चा व ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और सरपंच की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। प्र्रतिनिधिमण्डल में मोर्चा के जिला अध्यक्ष राकेश कुमार चौहान, जिला मंत्री शशिकांत बिलवाल, गौरीशंकर नागर, मोर्चा के प्रवक्ता अर्जुन, योगेश नागर आदि थे।

7 लाख पी कर भी तालाब खाली
लाडपुरा पंचायत समिति की गंदीफली ग्राम पंचायत के भगवानपुरा तालाब में मनरेगा में बिना काम हुए ही ग्राम पंचायत प्रशासन ने कागजों में लाखों रुपए का काम पूरा होना बता दिया है। हैरानी की बात तो यह थी कि तालाब की पाल पर कार्य पूर्ण होने का बोर्ड भी लगा दिया था। इसकी ग्रामीणों ने जिला प्रशासन ने शिकायत की तो रातोंरात बोर्ड को ही गायब कर दिया है।


ग्रामीणों की शिकायत पर पत्रिका टीम भगवानपुरा में देवनारायण मंदिर के पास स्थित रियासतकालीन तालाब पर पहुंची और मौके की स्थिति देखी तो पाया कि तालाब की पाल को मजबूत करने के लिए पत्थरों की चुनाई (पिचिंग) का जो काम पूरा होना बताया गया है, वहां एक पत्थर भी नहीं लगा हुआ है। तालाब का गहरीकरण का काम भी नहीं हुआ है।

मनरेगा में यह काम पूरा होना बताकर सवा सात लाख रुपए से अधिक का बिल उठा लिया गया है। ग्रामीण रामप्रसाद, गौरीशंकर, राजेन्द्र मेघवाल, रामदयाल आदि ने बताया कि तालाब में पिचिंग के नाम पर एक पत्थर भी नहीं लगाया गया है। जब तालाब की पाल पर कार्य पूर्ण होने का बोर्ड लगाया तब पता चला कि सवा सात लाख का काम पूर्ण होना बता दिया गया है।


इसकी शिकायत जिला कलक्टर, लाडपुरा उपखण्ड अधिकारी, जिला परिषद के आयुक्त को की गई है। जिला परिषद की टीम मौके पर आई थी, ग्रामीणों के बयान लेकर लौट गई है। कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


पंचायत ने सबूत नष्ट किए, ग्रामीणों ने संभालकर रखा
ग्रामीणों ने तालाब में पिचिंग के काम की शिकायत करने से पहले तालाब पर मनरेगा के तहत कार्य पूर्ण होने का लगाए गए पट्ट की फोटो खींच कर अपने पास सुरक्षित कर लिए थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद अज्ञात लोगों ने यह शिलापट्ट यहां से गायब कर दिया है। पत्रिका टीम ने देखा कि शिलापट्ट के अवशेष थे, लेकिन शिलापट्ट नजर नहीं आया। सूचना पट्ट के मुताबिक 21 जून 2018 को कार्य पूर्ण होना बताया गया है।


पानी की दिशा बदली
ग्राम पंचायत की ओर से इस साल गर्मी में तालाब में मनरेगा के तहत खुदाई का काम करवाया गया था। इसमें तालाब की मिट्टी खोद कर पानी की आवक के रास्तों में भर दी। इससे तालाब में पानी की आवक बंद हो गई है। इस कारण तालाब खाली रह गया है। तालाब में आने वाला पानी खेतों में भर रहा है।

इससे किसानों की फसलें नष्ट हो रही है। ग्रामीणों की शिकायत पर कैथून पुलिस के पहरे में ग्राम पंचायत में सीमेंट के पाइप लाइकर तालाब में पानी की आवक का रास्ता बनाया था।

 

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