घर में घूंघट में रहने वाली ये बहू रानियां, आज खेल रही हैं राजनीतिक पारी

घर में घूंघट में रहने वाली ये बहू रानियां, आज खेल रही हैं राजनीतिक पारी

Abhishek Gupta | Publish: Nov, 15 2017 05:00:28 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

निकाय चुनाव की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है। वैसे-वैसे चुनाव में रंग और भी भरता जा रहे हैं।

लखीमपुर खीरी. निकाय चुनाव की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है। वैसे-वैसे चुनाव में रंग और भी भरता जा रहे हैं। कभी घरों में घूंघट में रह कर बच्चों और पतियों की देखभाल करने वाली बहू रानियां इन दिनों शहर के हर वार्ड, गली गली की खाक छान रही है। चुनाव भले ही उनके पतियों की प्रतिष्ठा का सवाल हो, लेकिन यह चुनाव उनके नाम पर ही लड़ा जा रहा है। बात जब पति की प्रतिष्ठा की होती है, तो उनको अपना चेहरा दिखाना भी लाजमी है। हालांकि लखीमपुर नगर पालिका की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाने के बाद इस चुनाव में महिला प्रत्याशियों की लाइफ स्टाइल भी बदल गई है।

हर रोज उन्हें वोट मांगने के लिये अपने लाव लश्कर के साथ निकलना ही पड़ता है। यही नहीं सुबह लाव लश्कर के साथ निकलने के बाद उनकी वापसी शाम को ही होती है। हम बात कर रहे हैं ऐसी ही दो महिला प्रत्याशी बहूओं की जिनका इससे पहले राजनीति से कोई नाता ही नहीं रहा। इनमें से एक निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश बाजपेई की बहु लता बाजपेई है जो कि निर्दलीय चुनाव मैदान में है। और दूसरी ट्रंस्पोटर मोहन बाजपेई की पत्नी रमा बाजपेई हैं जो बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही है।

अब तक वह अपने परिवार की सारी जिम्मेदारी उठा रही थी। घर पर समय से खाना बनाने से लेकर सभी सदस्यों की देखभाल करना उन को बखूबी निभाती रहीं। और उनमें से बचा हुआ समय वे टीवी, मोबाइल, शॉपिंग और कुछ अन्य काम में व्यतीत करती थीं। वहीं अब परिवार से मिली ऐसी जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई है जिसको वे खुद ही एक महिला उम्मीदवार के रूप में निभा रही है।

चेहरे पर बिना किसी थकान के वे महिलाओं से वोट मांगने की अपील कर रही हैं। शहर की जनता से उन्हें एक मौका देने की गुजारिश कर रही हैं। चुनाव में राजनीतिक दल से मिली जिम्मेदारी को भी वह बखूबी निभा रही है। अब अगर उनको कुछ याद है तो बस इतना ही कि अगले दिन किस वार्ड में निकलना है।

इसी तरह से एक और बड़े सियासी दल के बारे में बात करें तो उनका भी इससे पहले सियासी गुणा-गणित से कोई नाता नहीं था। हालांकि राजनीतिक में लंबे अरसे से जुड़े हैं। लेकिन आरक्षण के चलते पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना उनके लिए भी जरूरी हो गया है। अब इन बहुरानियों के लिये सुबह से लेकर शाम तक केवल प्रचार और प्रसार जिंदगी का हिस्सा बन गया है। सुबह से काम करना पड़ता है। संगठन से मिलने वाले अगले दिन का कार्यक्रम ही उनको याद रहता है। चुनाव के परिणाम के लिए सभी बहुएं चुनाव मैदान में जी जान से जुटी हुई हैं।

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bahurani in election IMAGE CREDIT: Patrika
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