ब्रिटेन में भारत के भगौड़े विजय माल्या को लगा बड़ा झटका

ब्रिटेन में भारत के भगौड़े विजय माल्या को लगा बड़ा झटका

Saurabh Sharma | Updated: 27 Jul 2018, 01:07:26 AM (IST) कॉर्पोरेट

ब्रिटेन की कोर्ट में माल्या के लिए यह फैसला बड़ा झटका देने वाला है। वहीं भारत सरकार को ब्रिटेन की कोर्ट के इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी।

नर्इ दिल्ली। भारत के भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं। भारत ही नहीं अब ब्रिटेन में विजय माल्या को झटका लगने लगा है। ब्रिटेन की अपीलेंट कोर्ट ने वहां के हाई कोर्ट द्वारा 13 भारतीय बैंकों को माल्या से 1.14 अरब पाउंड की वसूली की अनुमति देने के फैसले के खिलाफ माल्या को अपील करने की अनुमति नहीं दी है। ब्रिटेन की अपीलीय अदालत ने 62 वर्षीय कारोबारी को हाईकोर्ट के 8 मई के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

जज ने दिया यह फैसला
विजय माल्या भारत में धोखाधड़ी तथा मनी लांड्रिंग के आरोपों के मद्देनजर अपने प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन की कोर्ट में सुनवाई का सामना कर रहे हैं। अपीलेंट कोर्ट के जज एंड्र्यू हेनशॉ ने अपने फैसले में माल्या की संपत्तियां जब्त करने पर रोक लगाने से मना करते हुए उसे अपील करने का अधिकार देने से इनकार कर दिया है। ब्रिटेन की कोर्ट में माल्या के लिए यह फैसला बड़ा झटका देने वाला है। वहीं भारत सरकार को ब्रिटेन की कोर्ट के इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी।

बैंकों को सभी संपत्तियों पर होगा अधिकार
आदेश के बाद भारतीय बैंकों जिसमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉरपोरेशन बैंक, फेडरल बैंक, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया तथा जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को इंग्लैंड और वेल्स में भी माल्या की संपत्तियों पर भारत के फैसले को लागू करने का अधिकार होगा।

इससे पहले एेसे भी मिले थे संकेत
वहीं दो दिन पहले सब बात के संकेत मिले थे कि विजय माल्या भारत आने को तैयार है। 'द हिंदू' में प्रकाशित खबर के अनुसार विजय माल्या ने कहा था कि वह बैंकों के साथ अपने सभी बकायों के भुगतान को तैयार है। जिसके लिए वो देश लौटना चाहता है। माल्या के अनुसार वह पहले भी बैंकों के साथ सेटलमेंट करने को तैयार था, इसके लिए उसने पीएम नरेंद्र मोदी को लेटर भी लिखा था, लेकिन सरकार की आेर से उसे कोर्इ सहयोग नहीं मिला। सूत्रों की मानें तो उसने 15 अप्रैल, 2016 को पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा था। जिसका उसे कोर्इ जवाब नहीं मिला था।

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