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बिहार की इन महिलाआें का कारोबार जगत में कमाल, कर रही करोड़ों में कमार्इ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट 'स्टार्ट अप' इंडिया से इन महिलाआें को काफी सपोर्ट मिला है।

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बिहार की ये महिलाएं देश के कारोबारी क्षेत्र में कर रही हैं कमाल, इन आइडिया के दम पर कमा रही करोड़ों

नर्इ दिल्ली। कहते हैं कि बेहतर शिक्षा उज्ज्वल भविष्य के लिए सबसे अधिक जरूरी होता है। देश के सबसे पिछले राज्यों में से एक बिहार अब अागे बढ़ने लगा है। भारत को सबसे अधिक सिविल सर्विस अधिकारी देने वाला ये राज्य अब कारोबार के क्षेत्र में कछुए की चाल से ही सही लेकिन अब आगे बढ़ रहा है। सबसे खास बात ये है कि यहां कि महिलाएं अब कारोबार के क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमां रही हैं। आज के सोशल मीडिया के दौर में ये महिलाएं अब उन उद्यमियों की कतार में खड़ी होती दिखार्इ दे रही हैं जिसमें देश के बड़े-बड़े धनकुबेर आैर उद्यमी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट 'स्टार्ट अप' इंडिया से इन महिलाआें को काफी सपोर्ट मिला है। इन्होंने एक बात तो साबित कर दिया है कि अगर मौका मिले तो ये भी अपने कारोबारी हुनर आैर आइडिया से देश-विदेश के कारोबार जगत में अपना मुकाम हासिल कर सकती हैं। आज हम आपको बिहार की एेसे ही कुछ महिलाआें के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी मेहनत आैर लगन से कारोबार के उस मिथक को तोड़ने में लगी हैं जो ये कहता है कि बिहार देश का पिछड़ा राज्य है यहां के लोग कारोबार नहीं कर सकते हैं।

शाजिया केसर (रिवाइवल शू लाॅन्ड्री)
सबसे पहले हम बिहार में सिल्क सिटी के तौर पहचान रखने वाले भागलपुर में जन्मीं शाजिया केसर की बात करते हैं। 35 साल की शाजिया ने 2014 में रिवाइवल लाॅन्ड्री नाम से एक स्टार्टअप शुरु की थीं। ये स्टार्ट अप सिर्फ जूतों के रिपेयर, सफार्इ, आैर रिफर्बिश्ड ही नहीं करता बल्कि आैर अन्य चमड़े के सामान जैसे जैकट आैर बैग के लिए भी काम करता है। शाजिया के पास फिजियोथेरेपी की डिग्री है आैर वो वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गेनाइजेशन (WHO) आैर यूनिसेफ (UNICEF) के साथ काम भी कर चुकी हैं। इस दौरान पहले दो-तीन साल में उन्होंने मार्केट रिसर्च में काम किया था। शाजिया का कारोबार बहुत बड़ा नहीं है लेकिन वो अब इसे आगे बढ़ाने का प्रयास में लगी हैै। फिलहाल पटना में दो स्टोर हैं आैर वो आने वाले सालों में इसे आैर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। शाजिया बताती है कि कारोबार के पहले एक दो साल तो उन्हें कुछ खास मुनाफा नहीं आैर लेकिन पारिवारिक सपोर्ट के वजह से वो कभी टूटी नहीं। बाद में जब उनका पटना के एक इनक्यूबेटर में सेलेक्शन हुआ तो इसमें उन्हें नेटवर्किंग से लेकर मेंटरशिप आैर हायरिंग के बारे में पता चला।

हंसा सिन्हा (जेनेसिस कंसल्टिंग)
बिहार की राजधानी पटना से मास कम्युनिकेशन में पढ़ार्इ पूरी करने वाली हंसा सिन्हा साल 2011 से जेनेसिस कंसल्टिंग नाम से एक एचआर साॅल्युशन कंपनी चालती है। ये स्टार्टअप उन्होंने परिमल मधुप के साथ शुरु किया था। फिलहाल जेनेसिस बिहार के अलावा झारखंड में भी काम कर रहा है। हंसा यही नहीं रूकी बल्कि उन्होंने एक आैर वेंचर की शुरुआत की है। इस वेंचर का नाम 'क्रिएटिव इंप्रिंट्स' है जो ब्रांडिंग, क्रिएटिव आैर इवेंट मैनेजेमेंट के क्षेत्र में काम करती है। योरस्टोरी डाॅट काॅम को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका ये नया स्टार्टअप एक मेंटर की मदद से पूरा हुआ। इसी साल दिसंबर में इस कंपनी के खुलने के 5 साल पूरे हो जाएंगे। इस मौके पर वो बड़े स्तर पर रिस्ट्रक्चरिंग, सर्विसेज के ट्रांसफार्मेशन आैर नर्इ हायरिंग के बारे में सोच रही हैं। फिलहाल वो पटना के कर्इ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं।

हिमानी मिश्रा (ब्रांड रेडिएटर)
36 साल की हिमानी मिश्रा ब्रांड रेडिएटर की सह-संस्थापक आैर मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष हैं। ये एक ब्रांड साॅल्यूशन कंपनी है जो कि टियर 2 आैर टियर 3 शहरों में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रही है। अक्सर लोग नया स्टार्टअप शुरु करने के लिए दिल्ली, मुंबर्इ आैर बेंगलुरू के तरफ रूख करते हैं। हिमानी का मकसद बिहार में डीजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में क्रांति लाना है। उनका कहना है कि इससे नौकिरयों के अवसर ताे बढ़ेंगे ही वहीं दूसरी तरफ बिहार के लोगों को दूसर शहरों तक नौकरी के लिए नहीं भागना पड़ेगा। हालांकि उन्हें खुद के लिए ही इस स्टार्टअप को शुरु करना आसान नहीं था। लेकिन हार नहीं मानने की जिद्द ने हिमानी को सफलता के रास्ते पर ले ही आया। अंत में उन्होंने लोगों को इस बात का यकीन दिला ही दिया है कि आज के दौर में सोशल मीडिय कितना अभूतपूर्व प्लेटफार्म है। उन्होंने लोगों को इस बात के बारे में भी जानकारी दी थी कि फेसबुक जैसे प्लेटफार्म से कैसे कम खर्च में बेहतर रिटर्न आॅफ इन्वेस्टमेंट (ROI) पाया जा सकता है।

नए कारोबार के लिए चुनौतियों से भरा है बिहार
हिमानी बिहार की सबसे बड़ी चुनौती के बारे में बात करते हुए कहती है कि यहां का वर्किंग एनवायरमेंट सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है। यहां ग्रमीण क्षेत्र करीब 90 फीसदी है आैर जो कि पूरी तरह से खेती पर निर्भर है। इस सेक्टर का पिछले दो दशक में प्रदर्शन बेहद खराब है। वहीं दूसरी तरफ के खेती के अलावा जिन दूसरे क्षेत्रों में काम करने में रूचि लेते हैं उनमें बैंकिंग आैर मार्केटिंग है। वहीं हंसा कहती हैं कि बिहार में स्टार्टअप काॅन्सेप्ट को बहुत देर से समझा गया है।

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