अजय लल्लू ने सपा, बसपा और भाजपा पर साधा निशाना, कहा- आरक्षण को खत्म करने की रची जा रही साजिश


- यूपी कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा आयोजित किया गया अति पिछड़ा वर्ग सम्मेलन
- संविधान, आरक्षण और देश को तोड़ने का काम कर रही योगी सरकार : अजय कुमार लल्लू

By: Hariom Dwivedi

Updated: 19 Jan 2021, 07:52 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. यूपी कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा 19 अति पिछड़ी जातियों के हक, सम्मान और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी के लिए कांग्रेस मुख्यालय पर अतिपिछड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जमींदारी उन्मूलन कानून लागू करके पिछड़ों को जमीन का अधिकार देने का काम कांग्रेस ने किया। संविधान में आरक्षण का प्रावधान देकर पिछड़ों को संसाधन में भागीदारी करने का मौका दिया। पिछड़े वर्ग के गरीब छात्रों के लिए छात्रवृत्ति देने की कार्य योजना बनाकर कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा में भागीदारी दिलायी। कुछ लोग आये और पिछड़ों को नारा दिया - जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी। लेकिन यह नारा सिर्फ नारा ही रहा। उन्होंने कहा कि आज लड़ाई तेरी मेरी की नहीं है। आज संविधान खतरे में है, आरक्षण को खत्म करने का षडयंत्र रचा जा रहा है। सबको एक साथ मिलकर कांग्रेस के साथ चलना होगा। देश, संविधान रहेगा तो आरक्षण और प्रतिनिधित्व भी रहेगा।

अजय लल्लू ने कहा कि कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टी की नीयत, नियति में अति पिछड़े वर्ग को लेकर कोई कार्यक्रम होता ही नहीं है। निषाद, धीवर, कश्यप, मल्लाह, केवट, बिन्द, प्रजापति को नदी खनन का पट्टा होता है पर लाभ इस समाज को कभी नहीं मिला। मैं भी अति पिछड़े समाज से आता हूं। मद्वेसिया समुदाय से हूं। मेहनत के बल पर छोटा-मोटा काम करते हैं। सपा, बसपा और भाजपा ने केवट, बिन्द, मल्लाह के नदी, नाले, तालाब के पट्टे का अधिकार इन तीनों ने ही छीना है। इस समुदाय के संसाधनों पर भागीदारी कांग्रेस ही सुनिश्चित कर सकती है।

अजय लल्लू ने कहा कि बुंदेलखंड में इसी समाज के लोग कर्ज के चलते खुदकुशी कर रहे हैं। सरकारी नौकरी, विश्वविद्यालयों, केंद्र की नौकरियों में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व शून्य है। इस समाज के दम पर सपा, बसपा की दो बिरादरियों ने करोड़ों रुपये कमाए हैं। बुंदेलखंड में लोग कर्ज के चलते आत्महत्या कर रहे हैं। खनन का अधिकार रखने वाले खनन से कोई आय नहीं कर पा रहे हैं। 69000 शिक्षक भर्ती में पिछड़ों के अधिकार पर डाका डाला गया। निजीकरण को बढ़ावा देकर पिछड़ों के आरक्षण को समाप्त किया जा रहा है। संविधान को कुचला जा रहा है। दलितों, पिछड़ों पर ऐतिहासिक अन्याय हो रहा है।

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